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कानून के डंडे से घोटाले रोकेगी सरकार

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कारपोरेट सेक्टर की ऑडिटिंग प्रणाली को नियंत्रित करने वाले आईसीएआई के ऊपर एनएफआरए लाने की तैयारी। वित्तीय घोटालों को रोकने में नाकामयाब  रही वर्तमान प्रणाली
राजीव जयसवाल/रचिता चावला
अपने वित्तीय हितों को संरक्षित करने के लिए एक व्यापारी या कारपोरेट अगर किसी की सबसे ज्यादा मदद लेता है तो वह है चार्टर्ड अकाउंटेट यानी सीए प्रोफेशनल और आडिट फर्में। सीए प्रमुख रूप से उसे टैक्स बचाने और आडिट फर्म उसके आय-व्यय, लाभ-हानि का ब्योरा जांचने का काम करती हैं। लेकिन सीए और ऑडिट फर्में हमेशा उस व्यापारी को सही और कानूनी रास्ता दिखातीं हैं, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। जब कोई बड़ा स्कैम सामने आता है तो पूरी जिम्मेदारी उस व्यापारी या कारपोरेट पर छोड़ दी जाती है, जबकि सीए और ऑडिट फर्म दोनों की न तो कोई जवाबदेही होती है न ही कोई जिम्मेदारी। 12,700 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले में भी यही बात सामने निकल कर आ रही है। कहा जा रहा है कि अगर सरकार ऑडिट फर्मों को नियंत्रित करने वाली बॉडी आईसीएआई के इतने दबाव में न होती तो इस घोटाले का पता काफी पहले ही लगाया जा सकता था। किसी भी वित्तीय घोटाले के सामने आने के बाद सरकार का काम तो बाद में शुरू होता है लेकिन चार्टर्ड अकाउंट और ऑडिटिंग कंपनियों की इस वास्ते जानकारी पहले से होती है। यह बात अलग है कि अपने निजी हितों के लिए वे इन्हें उजागर नहीं करते।

आईसीएआई की है पहली जिम्मेदारी :

ये लोखा-जोखा जांचने वाली ऑडिट फर्में भी सीए व्यवसायियों के द्वारा ही संचालित होती हैं और इनकी नियामक संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टेड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) है। 2009 में हुए सत्यम घोटाले के बाद हालांकि इस संस्था के अधिकारों में कमी की गई थी, लेकिन अभी भी ये इतनी ताकतवर है कि इन्हें स्वयंभू कहना बड़ी बात नहीं है। पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में सामने आया है बैंक ने इसका आंतरिक और बाह्र दोनों प्रकार का ऑडिट कराया था लेकिन घोटाला 7 वर्षों तक चलता रहा और किसी को कानों कान खबर नहीं हुई। ऐसे में अब सरकार इन ऑडिट फर्मों  के अलावा स्वतंत्र नियामक संस्था के गठन पर विचार कर रही है।

आईसीएआई के पर कतरने की तैयारी में सरकार :

आईसीएआई अपने आप में इतनी ताकतवर है कि 8 माह पहले इसके स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इनसे सरकारी और निजी उपक्रमों में इमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभानी की अपील करनी पड़ी थी। कंपनी एक्ट 2013 के सेक्शन 132 के तहत इसे अपने पाठ्यक्रम को निर्धारित करने, परीक्षाओं का संचालन करने, अपने नियम-कानून खुद बनाने और व्यवसाय में अनाचार करने वालों को दंडित करने का अधिकार प्राप्त है। लेकिन अपनी कारगुजारियों को लेकर बीते 11 वर्षों में आसीएआई ने अब तक मात्र 25 सीए को सजा दी है। शायद यही वजह है कि पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इसी माह नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए) के गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इस नये माध्यम से सरकार ऑडिटिंग प्रोफेशनल्स के ऊपर स्वतंत्र नियामक स्थापित करने की तैयारी कर रही है।

आईसीएआई कर रही है विरोध :

हालांकि आईसीएआई की ओर से सरकार के इस कदम का जोरदार ढंग से विरोध किया जा रहा है। उसका कहना है कि आईसीएआई की स्थापना भी भारत सरकार के एक एक्ट द्वारा की गयी है। अगर सरकार एनएफआरए का गठन करती है तो ऑडिट की लागत में लाभ की तुलना में दोगुना इजाफा हो जायेगा। देश में इनकी लॉबी की पकड़ इस प्रकार मजबूत है कि अगर कोई सीए किसी गैरकानूनी व्यावसायिक गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है तो सरकार या अन्य कोई नियामक संस्था द्वारा इन्हें दंडित करने का अधिकार नहीं है। वर्ष 2015, नवंबर के एक प्रकरण का उदाहरण ले सकते हैं, जिसमें शेयर बाजार नियामक सेक्यूरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने मनी लांड्ररिंग में लगी 132 लिस्टेड कंपनियों को निलंबित कर दिया था, इसमें सरकार ने 34 ऐसे सीए की रिपोर्ट आईसीएआई के पास भेजी थी जो समूह कंपनियों की मदद से मनी लांड्ररिंग में संलिप्त पाये गये थे। लेकिन आईसीएआई ने किसी आरोपी चार्टर्ड अकाउंड के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

क्यों है एनएफआरए की जरूरत :

भारत में जहां आत्मनियंत्रित ऑडिट निकाय प्रणाली लागू है, वहीं दुनिया के 50 से अधिक देश स्वतंत्र ऑडिट प्रणाली को अपना चुके हैं। आत्मनियंत्रित प्रणाली की वजह से देश काफी नुकसान उठा चुका है। बीते एक दशक में सामने आ चुके तमाम वित्तीय घोटाले यह बताने के लिए काफी हैं कि यह प्रणाली इन्हें रोकने में नाकाम रही है। कॉरपोरेट क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए सरकार नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए) के गठन पर विचार कर रही है। यह देश की ऑडिटिंग कंपनियों के ऊपर एक स्वतंत्र नियामिकीय प्राधिकरण के रूप में काम करेगा। हालांकि इसके गठन से आईसीएआई के अधिकार क्षेत्र में कमी नहीं आयेगी, क्योंकि यह संस्था रूटीन मामलों की जांच उसी प्रकार करती रहेगी और एनएफआरए सिर्फ बड़े मामलों में ही हस्तक्षेपर करेगा। देश में स्टॉक मार्केट, इंश्योरेंस, टेलीकॉम और रियल इस्टेट के लिए स्वतंत्र नियामकीय प्रणाली लागू है। जहां इन प्राधिकरणों ने अपने न्यायिक क्षेत्र में आने वाले निकायों को बेहतरीन तरीके से व्यवस्थित किया हुआ है।