Home film news किसी भी कला के लिए भाषा आईना है : गिरिजा शंकर

किसी भी कला के लिए भाषा आईना है : गिरिजा शंकर

428
0

केवल तिवारी/टि्रन्यू
चंडीगढ़, 28 मार्च

चित्र : मनोज महाजन

चित्र : मनोज महाजन

कला का कोई भी स्वरूप हो, भाषा उसका आईना होती है। कहानी, किरदार के हिसाब से अगर भाषा सशक्त है तो उसका प्रभाव उतना ही होता है जितना अदाकारी का। यह कहना है मशहूर टीवी सीरियल ‘महाभारत’ में धृतराष्ट्र की भूमिका निभाने वाले अभिनेता गिरिजा शंकर का। गिरिजा बुधवार को ट्रिब्यून दफ्तर पहुंचे। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय में उन्होंने हिन्दी, पंजाबी, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षण लिया। इन दिनों बॉलीवुड की दो फिल्मों और हॉलीवुड के लिए काम में व्यस्त गिरिजा ने अपने फिल्मी कॅरिअर, आगे की योजनाओं और तमाम मसलों पर बातचीत की। उन्होंने कहा, ’35 साल पहले चंडीगढ़ के टैगोर थियेटर में मंचन करता था। ट्रिब्यून से भी नाता तभी से है। आज लग रहा है कि अपने दूसरे घर पहुंचा हूं।’ चंडीगढ़ में अपनी एक शूटिंग के सिलसिले में आये गिरिजा ने यह भी बताया कि महाभारत के कलाकार जल्दी ही मिलेंगे और एक संगठन बनाएंगे। सीरियल महाभारत में ‘नेत्रहीन’ का किरदार निभाने में कितनी मेहनत करनी पड़ी, पूछने पर गिरिजा ने कहा, ‘नेत्रहीन व्यक्ति सिर्फ शारीरिक तौर पर ही वैसा नहीं होता, उनका माइंड सैट भी अलग होता है। सबकुछ कल्पना पर आधारित।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने ब्लाइंड स्कूल में ट्रेनिंग ली। नेत्रहीन लोगों के बीच कई दिनों तक रहा। आंखों को खास अंदाज में रखने के लिए कड़ी मेहनत की।’ महाभारत में कौन सा किरदार उनको सशक्त लगता है, पूछने पर गिरिजा ने कहा कि महाभारत की कहानी ही धृतराष्ट्र और कृष्ण के इर्द-गिर्द घूमती है। भावी योजनाओं के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘फिल्मी कॅरिअर के अलावा मैं अपनी कला के जरिये समाज के लिए कुछ करना चाहता हूं। मेरा नाता राजस्थान ,पंजाब के पटियाला और चंडीगढ़ से रहा है। मैं यहां आगे भी सक्रिय रहना चाहता हूं।’उन्होंने कहा कि आजकल कुछ लोग फिल्मी दुनिया में अचानक आते हैं और जल्दी गायब हो जाते हैं। ऐसा इसलिए कि सफलता का शार्टकट नहीं होता। कला के लिए तपना पड़ता है, मंजना पड़ता है। धृतराष्ट्र की छवि का ठप्पा लगने का कोई नुकसान तो नहीं हुआ, पूछने पर गिरिजा कहते हैं, ‘मुझे कोई नुकसान नहीं हुआ। मैंने खुद को किसी छवि में बंधने नहीं दिया। लोगों को वह किरदार बहुत अच्छा लगा तो खुशी होती है।’ सिने जगत में विवाद के सवाल पर गिरिजा ने कहा, ‘फिल्मकार अपनी तरफ से बेहतर करते हैं, हां यह जरूर है कि कुछ लोग विवाद जानबूझकर भी पैदा कर देते हैं। विवाद के बजाय लोगों को कला पर ध्यान देना चाहिए।’