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Share Market में trading कर सकती है मालामाल

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Derivative market

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हमारे समाज में आमतौर पर Share Market को gambling समझा जाता है। ज्यादातर लोग इसमें हाथ डालने से डरते हैं और भी डालते हैं वे म्युचुअल फंड यानि sip के छाते के साथ। लेकिन शायद आपको पता भी है कि ढेरों लोग intraday trading (दिन-प्रतिदिन) और swing (कुछ हफ्तों या दिनों की) trading करके मोटा मुनाफा भी कमा लेते हैं। लेकिन ये वे लोग हैं, जिन्होंने SHARE MARKET को अच्छी तरह से समझा है और उसके सभी तकनीकी पहलुओं से वाकिफ हैं। Derivative Segment के अस्तित्व में आने के बाद यह और भी लाभदायक हो गयी है। Derivative market

सस्ती हो गयी है trading

देश में पहले trading करना काफी खर्चीला होता था क्योंकि ट्रेडिंग सिर्फ CASH MARKET में होती थी, इसके तहते आप कंपनियों के शेयर खरीद कर रखते थे, जो ब्रोकर एक कागजी रसीद के माध्यम से जारी करता था। लेकिन अब शेयर खरीदने-बेचने की कार्रवाई कंप्यूटर के माध्यम से online होती है। इसके अलावा तकनीक के प्रसार के साथ कैश मार्केट के अलावा DERIVATIVES MARKET अस्तित्व में आ चुकी है। जिसमें ट्रेडिंग करने के लिए money की उतनी जरूरत नहीं पड़ती, जरूरत है तो बस learning की।Derivative market
तो आइए समझते है शेयर ट्रेडिंग की कुछ जानकारियां। Latest Share Market trading के लिए ये सारी चीजें समझना काफी जरूरी है। Derivative market

क्या है CASH MARKET और DERIVATIVES में अंतर

आपको बता दें शेयर बाजार में देश के 2 सबसे बड़े stock exchange NSE और BSE के माध्यम से हम 2 प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग कर सकते हैं। उनमें एक है कैश मार्केट और दूसरा है। Derivative market.

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Cash Market में चुकाना होता है पूरा मूल्य

कैश मार्केट में हम किसी सेक्युरिटी का पूरा मूल्य चुकाकर उस विशेष स्टॉक खरीद लेते हैं। वहीं DERIVATIVES में हम SECURITY न खरीदकर उसके F&O(F&O) CONTRACT खरीदते हैं। इन दोनों के तहत उस स्टॉक को CASH में खरीदने या बेचने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन इसके भाव बढ़ने या घटने की स्थिति बिलकुल CASH MARKET में उस स्टॉक की तरह होती है। Derivative market.

ऐसे समझें Derivative Market को

उदाहरण के लिए स्टेट बैंक का वर्तमान मूल्य 250 रुपए है। ये lot में होते हैं। इसके F&O का lot size 3000 शेयरों का है। अगर हम इसका lot size के मात्रा के शेयर कैश में खरीदते हैं तो हमें 7,50,000 रुपए ब्रोकर के पास जमा कराने होंगे। लेकिन इसका फ्यूचर हमें एक से डेढ़ लाख रुपए ही चुकाकर मिल जायेगा, जबकि SBI स्टॉक बढ़ने पर हमें फ्यूचर से लगभग वही लाभ प्राप्त होगा, जो SBI के CASH MARKET में बढ़ने पर प्राप्त होता है। Derivative market.

ये हैं F&O market का risk

&O market सौदे को महीने के अंतिम Thursday की तारीख तक SETTLE करना होता है। उदाहरण के लिए हम SBI के शेयरों को कैश मार्केट में खरीदकर अपनी मर्जी के हिसाब से अपने पास रख सकते हैं, लेकिन अगर इसे F&O में खरीदते हैं तो इसके DERIVATIVES को माह के अंतिम बृहस्पतिवार तक सेटल करना होता है, अगर हम इसे आगे ले जाना चाहते हैं तो अगले माह के कांट्रैक्ट का सौदा करना होता है। सेटलमेंट की तारीख को एक्सपायरी डेट कहा जाता है। Derivative market.

करा सकते हैं roll over :

ट्रेडर्स चाहें तो अपने सौदे को अगले महीने के लिए roll over भी कर सकते हैं। roll over का मतलब एक माह के सौदे को काटकर दूसरे माह का कांट्रैक्ट खरीदना या बेचना होता है। डेरिवेटिव्स के तहत STOCKS, इंडेक्स, मेटल, गोल्ड, क्रूड, करेंसी आदि में कारोबार किया जाता है। Derivative market.

ये है F&O trading का सबसे बड़ा लाभ

इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि कम पैसे में हम ट्रेडिंग करके मोटा मुनाफा कमा सकते हैं, लेकिन इसमें यही खोट है कि इस सेगमेंट में तभी हाथ डालें जब ट्रेडिंग में पूरी तरह से प्रशिक्षित हों और शेयर/कमोडिटी के मूवमेंट के बारे में पूरे जानकार/आश्वस्त हों। अन्यथा इसमें जितना लाभ होता है उतनी ही हानि हो सकती है। Derivative market.

Index में भी होता है वायदा कारोबार

वायदा कारोबार index या STOCKS में भी होता है। फ्यूचर कैश मार्केट के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड करते हैं। इसमें ट्रेडिंग के लिए अनुभव की जरूरत होती है। यह हेजिंग में भी काम आता है। Derivative market.

ऐसे होती है option की trading

Option trading को समझने के लिए option को समझना जरूरी है। ऑप्शन 2 तहर को होते हैं call और put। Buyer option को कॉल और seller option को को put कहते हैं। जब call या put खरीदी जाती है उसके premium प्रीमियम का पैसा चुकाना होता है। बेचने के लिए future के lot का पैसा चुकान होता है। ऐसा risk cover की वजह से किया जाता है। पैसा चुकाने के ये आदेश SEBI की तरफ से होते हैं। Derivative market.

फायदे में रहते हैं option sellers

यहां एक बात ध्यान रखने वाली है कि अधिकतर ऑप्शन सेलर यानि बेच कर चलने वाले ट्रेडर खरीद कर चलने वाले ट्रेडरों की तुलना में फायदे में रहते हैं। भारत में निफ्टी और बैंक निफ्टी के फ्यूचर एंड ऑप्शन में इंडेक्स ट्रेंडिंग की जा सकती है। लेकिन इसके लिए अच्छी training की जरूरत पड़ती है। Derivative market.

सौदे को HEDGE करने का सबसे
अच्छा माध्यम है एफ एंड ओ

F&O के माध्यम से हम कम पैसों में ट्रेडिंग तो कर ही सकते हैं, साथ ही अपने सौदे और फंड को HEDGE भी कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर हमने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर खरीद कर उस सौदे को HEDGE करना चाहते हैं तो हम उसके फ्यूचर में लॉट साइज 3000 शेयर कैश में खरीद सकते हैं और अगर आपको लगता है कि SBI में बड़ी गिरावट आने वाली है तो उस सौदे को HEDGE कर सकते हैं। इसके लिए उस या अगले महीने के कांट्रैक्ट का एक फ्यूचर बेचकर सौदे को HEDGE कर सकते हैं। अगर शेयर में गिरावट आई तो 3000 शेयरों में जितना नुकसान हुआ है उतना ही फ्यूचर के एक बेचे हुए लॉट में फायदा होगा। इसी प्रकार option में भी कर सकते हैं। Cash, future और option में अच्छी hedging सीखने के लिए बीटा वैल्यू का कैलकुलेशन करना पड़ता है। Derivative market.

अब समझें एफ एंड ओ से जुड़े जोखिम

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हमें एफ एंड ओ कम मार्जिन और ब्रोकरेज में ट्रेडिंग की सुविधा तो उपलब्ध कराता है लेकिन इसके जोखिम को समझना भी जरूरी है। वायदा बाजार में कैश मार्केट की तुलना में जोखिम अधिक है। उदाहरण के लिए हम कैश में कोई सौदा 10 लाख रुपए में करते हैं। उतनी ही क्षमता का सौदा फ्यूचर में मात्र डेढ़ लाख और ऑप्शन में मात्र कुछ हजारों में कर सकते हैं, लेकिन उसमें लाभ या हानि उतनी ही होगी जितनी कैश मार्केट में 10 लाख में आने वाले शेयरों की संख्या में होती है। Derivative market.

Derivative market में trading से पहले
समझने की जरूरत

इस वजह से जो लोग शुरुआत कर रहे हैं उन्हें डेरिवेटिव्स में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सौदे करके पहले अनुभव हासिल करना चाहिए। खासकर तौर पर शुरुआत में ऑप्शन का अभ्यास खरीद के साथ करना चाहिए, बाद में उसे बेचना का अभ्यास शुरू करें। क्योंकि ऑप्शन खरीदना सस्ता है, लेकिन उसे बेचने के लिए पूरे एक फ्यूचर के बराबर मार्जिन मनी एक्सचेंज में जमा करनी होती है। इसके अलावा आप अपनी कुल पूंजी के 15 से 20 प्रतिशत से अधिक Derivative market में निवेश न करें। इसके अलावा शुरुआत अगर पेपर ट्रेड से की जाये तो और भी बेहतर है। शुरुआत में सीखने के हिसाब से ट्रेडिंग करें। निफ्टी के ऑप्शन में ट्रेडिंग अच्छा विकल्प है। Derivative market.

Derivative segment में आ चुकी है
150 प्रतिशत की बढ़ोतरी

शेयर बाजार में फ्यूचर और ऑप्शन (एफ एंड ओ) सेगमेंट को डेरिवेटिव्स मार्केट या वायदा बाजार के रूप में भी जानते हैं। ट्रेडिंग को लेकर यह सेगमेंट लोगों को बीच कितना लोकप्रिय हो चुका है कि इस बात का अंदाज हम इस तथ्य से ही लगा सकते हैं कि बीते 8 सालों में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में जहां कैश मार्केट में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी आई है, वहीं दूसरी ओर Derivative segment में ट्रेंडिंग में 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी आई है। Derivative market.

Derivatives का volume 90 प्रतिशत से अधिक

वर्तमान में एनएसई में जितने भी वाल्यूम की ट्रेंडिंग हो रही है, उसमें 90 प्रतिशत से अधिक योगदान डेरिवेटिव्स मार्केट का है। मोबाइल फोन पर ट्रेंडिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध होने के बाद तो इसमें और भी तेजी आ गयी है। वित्त वर्ष 2015-16 में शेयर ट्रेडिंग के मोबाइल एप डाउनलोड करने के आंकड़ों में लगभग 3 प्रतिशत यानि वे बढ़कर 170 प्रतिशत हो चुके हैं। इस दौरान मोबाइल फोन के द्वारा जितने भी ट्रेड डाले गये उनमें 90 प्रतिशत डेरिवेटिव्स मार्केट के थे। Derivative market.