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Karnataka : जब सत्ता ही राष्ट्र हो जाये, सत्ता ही गान……………..

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karnataka election
Indian leaders file photo

जब सत्ता ही राष्ट्र हो जाये और सत्ता ही गान हो जाये तो फिर बिन सत्ता के काहे का ‘राष्ट्र और काहे का गान’। यह बात भी तब साबित हुई कर्नाटक विधानसभा (karnataka election) में पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा (yeddyurappa) बहुमत साबित नहीं कर सके। कर्नाटक में मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण करने के 55 घंटे के अंदर ही येदियुरप्पा (yeddyurappa) ने पद से इस्तीफा दे दिया। वह भी बहुमत साबित करने से पहले। हड़बड़ी इतनी कि सदन के अंदर उन्होंने सामान्य औपचारिकताओं का पालन भी नहीं किया। कम से कम राष्ट्रगान का तो इंतजार किया जा सकता था। भाषण दिया, अपनी बात रखी और चलते बने। खैर इसमें येदियुरप्पा का इतना दोष नहीं है, वर्तमान में भारतीय लोकतंत्र कुछ चल ही इस तरह से रहा है कि अपनी बात सुनाओ, अपने मन की बात सुनाओ और चलते बनो। बेहतर होता कि येदियुरप्पा इस्तीफे का फैसला दिल्ली में बैठे हाईकमान के आदेश पर न करके तमाम निराशाओं का जहर पीते। वह वाजपेयी (atal bihari vajpayee) की तरह भाषण देते, विधानसभा में मुद्दों के आधार पर विपक्षी पार्टी के विधायकों से उनके समर्थन की मांग करते, वोटिंग होती, अगर उसमें हारते तो फिर इस्तीफा दे देते। इससे देश और उनके प्रदेश की जनता को उनकी दृष्टि और भावी योजनाओं का खाका समझने में मदद मिलती और आगे के मार्ग प्रशस्त होते।
karnataka election के बाद अब सरकार बनाने की कवायद HD Kumaraswamy की पार्टी Janata Dal Secular करेगी और congress उसमें सहयोगी की भूमिका निभायेगी।

karnataka election में सीखने की प्रक्रिया की गुजरी देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी Congress

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी (Oldest Political Party) कांग्रेस सीखने की प्रक्रिया से गुजर रही है। इस समय में सीखने में लगी है दांव और वह भी अपनी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी BJP से। जिस दांव से BJP ने गोवा, मणिपुर और मेघालय में सत्ता कांग्रेस के जबड़े से छीन ली, वही चला है अब कांग्रेस ने कर्नाटक चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद BJP के खिलाफ। वैसे चाहे भाजपा हो अन्य क्षेत्रीय पार्टियां वे जो खेल आज Congress के खिलाफ खेल रही हैं ये सब उन्होंने सीखा उसी Congress से है। अब यह वक्त का तकाजा है कि कांग्रेस पार्टी को अपने पुराने दांव-पेच पर उतरना पड़ा है।

आखिर कहां से आती है रैलियों में भीड़ 

कर्नाटक चुनाव प्रचार में Rahul Gandhi ने किये JD(S) से रिश्ते खराब

karnataka election में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य में प्रमुख प्रचारक राहुल गांधी पूर्व प्रधानमंत्री HD deve gowda के जनता दल (एस) में लगे एस का उच्चारण संघी के रूप में करते रहे थे यानि वे उसे जनता दल सेक्यूलर के बजाय भाजपा की बी टीम बता रहे थे। बाद में उन्हीं Rahul ने वोटों की गिनती समाप्त होने से से पहले ही जनता दल (एस) को मुख्यमंत्री की कुर्सी ऑफर कर दी है। हालांकि चुनाव के पूर्व इस तरह का कोई प्रस्ताव कांग्रेस की ओर से नहीं आया, शायद वह कर्नाटक के चुनावी रण को आसान मानकर चल रही थी। अन्यथा राहुल के सलाहकारों को इतना तो भान होगा ही कि किसी भी स्थिति में देवगौड़ा भाजपा के साथ नहीं जाने वाले, और ये स्थिति तब है जब चुनावी पंडित और सैंपल सर्वे karnataka election के बाद त्रिकोणीय विधानसभा (hung assembly) का संकेत दे रहे थे। ऐसी स्थिति में जेडी(एस) (Janata Dal secular) को किंगमेकर की भूमिका में उतरना ही था।