Home political news आपके डाटा से आपको ही कैसे जीतते हैं राजनेता

आपके डाटा से आपको ही कैसे जीतते हैं राजनेता

417
0
artificial intelligence

2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (american presidential election) में रूसी एजेंसियों (Russian agencies) पर ईमेल (email) और वेबसाइटों (websites) की हैकिंग कर चुनावों को प्रभावित करने के आरोप लगे थे। आरोप था कि रूसी सरकार (Russian Government) के दिशा-निर्देशों पर डीसीलीक्स.कॉम और विकीलीक्स जैसी वेबसाइटों से ईमेल की हैकिंग (hacking) कर अमेरिकी जनता के बारे में तमाम जानकारियां जुटाईं। उन जानकारियों से चुनाव अभियान के लिए लोगों की सोच को प्रभावित किया। दरअसल इसमें उस तकनीक का प्रयोग किया गया था, दुनिया जिसे artificial intelligence के नाम से जानती है।

इसके अलावा रूस में बैठे लोगों ने इस दौरान कई फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और इंस्टाग्राम (Facebook, Twitter and Instragram) जैसे सोशल मीडिया (Social Media) साइट्स पर अकाउंट्स बनाए और पोस्ट बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों तक पहुंचाये।

artificial intelligence
अब मन में ये सवाल उठना लाजमी है कि हैंकिंग से ऐसा आखिर क्या चोरी कर लिया गया जिससे चुनाव की रणनीति बना दी गयी? तो इसका जवाब है हैकिंग (hacking) के द्वारा लोगों की जानकारियों का डाटा चोरी कर लिया गया। इन जानकारियों से लोगों की आदतों और सोचने के तरीके उनके रुझानों का पता चला। उसी हिसाब से पोस्ट बनायी गयी और अमेरिकी जनता के सामने परोसी गयी और यह सब कुछ संभव हुआ Data Mining और उसमें artificial intelligence की तकनीकी (technology) के प्रयोग से।
दूसरी बात अगर आपको यह पढ़कर लग रहा है कि यह सबकुछ सिर्फ अमेरिका, रूस के मतलब की ही बातें हैं तो आप गलत हैं। अपने देश भारत में भी इसका प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। प्रयोग करने वालों में राष्ट्रीय, बहुराष्ट्रीय कंपनियों से लेकर राजनेता और राजनीतिक पार्टियां शामिल हैं। तो आइए समझते हैं डाटा, Data Mining और artificial intelligence से कैसे जीते जाते हैं चुनाव (election)।

artificial intelligence सबकुछ जानता है

artificial intelligence

artificial intelligence पूरी दुनिया में लोगों को रहन-सहन, उनके कार्यकलापों और उनके सोचने के तरीकों पर असर डाल रहा है। इसके अनुप्रयोगों से यह समझा जा सकता है कि हम किस प्रकार सोचते हैं या सोच सकते हैं और प्रतिक्रिया देते हैं। यहां तक कि विरोधों को लेकर जागरूकता पैदा करने में भी इसका प्रयोग होता है। भारत सरकार कृषि के क्षेत्र में इसके रचनात्मक प्रयोगों की संभावनाएं तलाश रही है।
एक व्यक्ति को artificial intelligence को लेकर सतर्क क्यों होना चाहिए, इसका सीधा सा जवाब है कि यह आप पर केंद्रित है। यह पूरी दुनिया के उद्योग क्षेत्र में क्रांति लाने वाला है। स्वास्थ्य, बैंकिंग, फाइनेंस, ई-कॉमर्स (E-Commerce), कृषि और उत्पादन क्षेत्र में इसके क्रांतिकारी प्रयोग शुरू हो चुके हैं। इसमें हमारे रहन-सहन, कार्य और मनोरंजन के साधनों को प्रभावित करने की पूरी क्षमता है। लेकिन artificial intelligence का प्रयोग यहीं तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र (democracy) में यह चुनाव भी जितवा सकती है और हरवा भी।

यह भी पढ़ें : कमाई की नयी ऊंचाई देती है ट्रडिंग

दलित आंदोलन में हुआ Data Mining का प्रयोग

 artificial intelligence

दलित आंदोलन (Dalit movement) को लेकर अप्रैल में हुए भारत बंद के दौरान इसके राजीनितिक प्रयोग की भी पुष्टि हो चुकी है। इस बंद के दौरान हार्वर्ड केनेडी स्कूल (बोस्टन, अमेरिका) के एक प्रोफेसर ने सोशल मीडिया के जरिये लोगों तो जागरुक किया। इसमें उन्होंने artificial intelligence की मदद ली। यह बंद सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति, जनजाति (schedule caste and schedule tribes) पर हो रहे अत्याचार को लेकर कानून के प्रावधानों को हल्का करने के विरोध में था।

यह भी पढ़ें : लैपटॉप, मोबाइल के बाद अब इंटरनेट (internet) से चलेगा आपका टीवी भी

artificial intelligence के जरिये उन्होंने भारत के डाटा आधारित मैनेजमेंट रणनीतियों का अध्ययन किया और इसका प्रयोग समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने के व्यावहारिक उपाय सुझाये। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राजनीतिक पार्टियों ने बंद को सफल बनाने के लिए भौगोलिक सूचनाओं और डाटा का प्रयोग किया गया।
उन्होंने बताया कि अगर आप ऑनलाइन उपलब्ध डाटा का विश्लेषण कर सकते हैं तो पता चलता है कि बंद के दौरान और Congress ने विशेष रूप से 100 निर्वाचन क्षेत्रों को सबसे अधिक हिट किया। ये वे क्षेत्र हैं जहां से दलितों पर अत्याचार की सर्वाधिक खबरें आती हैं। बड़ी बात यह है कि इस बंद का नेतृत्व किसी वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व के बिना किया गया था। इसमें राजनीतिक पार्टियों ने सरकारी रिकार्डों और जनसंख्या को लेकर जननांकीय सूचनाओं का प्रयोग किया था।

DATA है तो सबकुछ है

artificial intelligence

विशेषज्ञों के अनुसार Data Mining और उससे निष्कर्ष निकालने वाली तमाम कंपनियां artificial intelligence तकनीकियों (technologies) का प्रयोग जोरों से कर रही हैं। अगर आपके पास DATA है तो आप इसका प्रयोग तमाम तरीकों से कर सकते हो। हड़ताल या बंद का संचालन कर सकते हैं। चुनाव जीत सकते हो या हरवा सकते हो। किसी भी प्लेटफॉर्म से आपको अपनी बात किस समूह या क्षेत्र तक पहुंचानी है, इसका विश्लेषण किया जा सकता है।

बड़े Business का आधार बन रही Techonology

artificial intelligence
Data Mining के लिए तमाम सॉफ्टवेयर जैसे ऑफ द शेल्फ टूल्स, लाइब्रेरी, हीट मैप उपलब्ध हैं। इन तीनों ही तकनीकी का प्रयोग अपने अभियान के लिए सही लोगों, निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान के लिए किया जाता है। ताकि अपने संदेश को सही जगह, सही लोगों तक पहुंचा कर प्रभाव जमाया जा सके। यही वजह है कि प्रचार के लिए व्यक्तिगत लोग और कंपनियां डाटा हासिल करने की तमाम जुगत लगाती रहती हैं। भारत में संग्रहित किया जा रहा तमाम डाटा अ‍भी असंगठित रूप में है और कई कंपनिया व समूह इसे तेजी के साथ नियंत्रित और नियमित करने में लगे हैं।

क्या है artificial intelligence

artificial intelligence कंप्यूटर साइंस (Computer Science) की एक ब्रांच है जिसमें मशीनों इंसानी दिमाग की तरह प्रतिक्रिया देने लायक बनाने की क्षमता का अध्ययन किया जाता है। यानि कंप्यूटरों (Computers) को मनुष्य की तरह सोचने की क्षमता से युक्त बनाना। इससे लोगों के मनोभावों, कार्यकलापों, रहन-सहन, स्वास्थ्य को समझकर योजनाएं बनाने में मदद मिलती है। आज की तारीख में artificial intelligence का प्रयोग ई-कॉमर्स वेबसाइटों (E-commerce websites) से लेकर सामाजिक-आर्थिक समस्याओं को सुलझाने में हो रहा है। जब आप किसी अंजान जगह पर खड़े होकर गूगल पर अपने समीप का रेस्टोरेंट या सिनेमा हाल खोजते हैं तो गूगल artificial intelligence से ही आपको इसका उत्तर देती है।

अगर आप पैसे नहीं दे रहे तो आप खुद ही एक product हैं

बड़ी चीज यह है कि Data Mining के जरिये इसका प्रयोग अपनी बात को concerning target groups तक पहुंचाने और उन्हें प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। चुनाव, हड़ताल, आंदोलन हर वो चीज जिसमें लोगों की सामूहिक भागीदारी है, इसका प्रयोग अपना प्रभाव जमाने या आंदोलन को प्रभावित करने में किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये सारा डाटा आप खुद इन इंटरनेट कंपनियों को उपलब्ध करा रहे हैं। यानि कि जो गूगल, फेसबुक (Google, Facebook) आपको मुफ्त आपकी जरूरतों के हिसाब से जानकारी और उत्पाद मुहैया कराते हैं। उन कंपनियों के लिए आप खुद जानकारी का एक स्रोत और उत्पाद (Source and product) हैं।