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किसानों की income डबल करेंगे GOOGLE और IBM

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Smart farming

Agriculture क्षेत्र के तमाम विशेषज्ञ दिन-रात अपना माथा फोड़ रहे हैं लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसानों की आय 2022 तक दोगुना करने का फलसफा कैसे पूरा किया जाये। उनके इस सपने को साकार करने के लिए कृषि क्षेत्र को 10.50 प्रतिशत की दर से विकसित करना होगा। अब इस लक्ष्य को Smart farming और artificial intelligence के जरिये साधने का कार्यक्रम बनाया जा रहा है। सरकार ने नीति आयोग (NITI AAYOG) का अमला इस काम में लगा रखा है और नीति आयोग (NITI AAYOG) ने इस काम के लिए गूगल और आईबीएम को लगा दिया है।

नीति आयोग (NITI AAYOG) ने बनायी है विस्त्रत योजना

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नीति आयोग (NITI AAYOG) के सदस्य रमेश चंद ने एक रिपोर्ट पेश की है इसमें अर्ज किया गया है कि केवल कृषि से होने वाली आय को बढ़ाकर 53 प्रतिशत गरीबों को गरीबी रेखा से पार नहीं लाया जा सकता है। उन्होंने इसके लिए 7-सूत्रीय कार्यक्रम और किसानों के पास पशुधन को स्थिति को सुधारने की रूपरेखा प्रस्तुत की है।
प्रधानमंत्री ने नीति आयोग (NITI AAYOG) से Smart farming के क्षेत्र में नयी तकनीक के प्रयोग करने के अवसर ढूंढने के लिए कहा है। सूचना प्रौद्योगिकी (Information technology) की 2 सबसे बड़ी कंपनियां आईबीएम (IBM) और गूगल (GOOGLE) फसलों की बुवाई से पहले ही तमाम तरह की भविष्यवाणियां कर देंगी। मसलन पहले ही किसानों को बता दिया जायेगा कि फसल के वक्त मौसम कैसा रहेगा। मिट्टी कैसी है, पानी और खाद की कितनी जरूरत पड़ने वाली है। गूगल और आईबीएम इसके लिए artificial intelligence और बिग डाटा एनालिटिक्स (big data analytics) का प्रयोग करेंगी। एक बार यह मॉडल विकसित हो गया तो उसकी मदद से किसानों को समय-समय पर एडवायजरी जारी की जाती रहेंगी। Smart farming ही agriculture का सबसे बड़ा समाधान है।

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Smart Farming में DATA निभायेगा बड़ी भूमिका

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Smart farming के लिए पूरे देश में कुछ ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जा रही है जहां पर agriculture की मौसम संबंधी जरूरतों को तकनीक के जरिए आसानी से पता लगाया जा सके। यह प्रोजेक्ट 10 जिलों असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में शुरू हो चुका है। अभी डाटा एकत्र करने का काम चल रहा है दिसंबर में रबी की फसल की बुवाई का वक्त आएगा, तब तक यह तकनीक 100 फीसदी काम करना शुरू कर देगी। जिसके बाद इस प्रोजेक्ट को देश के दूसरे जिलों में भी लागू किया जाएगा।

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कीटों/बीमारियों को पता लगायेगी technology

artificial intelligence तकनीक के जरिए फसलों की निगरानी करने की तैयारी है। इसकी मदद से फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों/बीमारियों को पता पहले ही लगा लिया जायेगा और उसकी जानकारी किसान तक पहुंचा दी जायेगी। सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से किसानों को मौसम में होने वाले बदलाव के बारे में भी जानकारी पहुंचा दी जायेगी। Smart farming को लेकर यह जानकारी उन्हें कंप्यूटर या मोबाइल पर उपलब्ध करायी जायेगी। उपग्रह आधारित संचार प्रणाली पूरी प्रौद्योगिकी का हिस्सा होगा। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य होगा फसलों के उत्पादन में लागत कम करना। ताकि किसान को फायदा हो सके।

Smart farming के लिए बिखरी सूचनाएं करनी होंगी compile

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Smart farming के इस काम में आईबीएम की भूमिका यह होगी कि कंपनी artificial intelligence की मदद से खेत की मिट्टी, कीटनाशक, खाद, मौसम और agriculture से जुड़ी हुई अन्य जानकारियों को एक जगह पर जुटायेगी। नीति आयोग (NITI AAYOG) इस मॉडल से जुड़े संबंधित विभागों को एक छाते के नीचे लायेगा, ताकि इधर-उधर बिखरी सूचनाओं को एक स्थान पर लाया जा सके। डाटा की मदद से फसलों की समय से सप्लाई सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे फसल बर्बाद होने से बचेगी और किसान का धन और समय दोनों बचेगा। (IoT sensors, drones, image analysis, precision agriculture machinery) इस काम में बड़ी भूमिका निभायेंगे।

Smart farming को बढ़ावा देने को किसानों के लिए खोले गये हैं call centre

तेलंगाना, महाराष्ट्र और महाराष्ट्र के कुछ गांवों में किसानों के लिए कॉल सेंटर call centre खोल दिये गये हैं। उन्हें मोबाइल पर ऑटोमेटेड वॉयस कॉल आते रहते हैं। अगर कहीं मौसम खराब होने वाला है या कीड़ों का आक्रमण होने वाला है तो कॉल सेंटर call centre के कर्मी उन्हें पहले ही जानकारी उपलब्ध करा देते हैं। माइक्रोसाफ्ट ने एक ऐसा कृषि एप agri app विकसित किया है जो नमी सूचकांक बताता है। इससे पता चलता है कि फसल को कितने पानी और नमी की जरूरत है। यह एप फसल की बुवाई की सही समय भी बताता है। ये सारी चीजें Smart farming को बढ़ावा दे रही हैं।

किसानों की income ऐसे बढ़ायेगी artificial intelligence

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दरअसल agriculture में artificial intelligence की अवधारणा व्यापक रूप से हमारे सामने आ सकती है। जल्द ही Smart farming के तहत खेतों, इसकी मिट्टी, कीटनाशक, खाद, फसलों को नमी की जरूरत आदि के लिए ड्रोन का प्रयोग किया जा सकता है। किसानों की आय बढ़ाने लिए पैदावार बढ़ाना ही जरूरी नहीं है। क्योंकि ज्यादा पैदावर बाजार में demand and supply के आर्थिक नियमानुसार फसल दाम कम (reduce) कर देती है और इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके लिए 2 काम किये जाने जरूरी हैं। पहला है agriculture की लागत कम की जाये। फसल को उतना ही खाद, पानी और कीटनाशक दिये जाये, जितने जरूरी हों। दूसरा यह है कि कारोबार का पैसा किसान और उपभोक्ता के बीच में ही बंटे। यानि कि इसमें बिचौलिये की भूमिका को कम किया जाये। किसान से सस्ती दरों में फसल खरीदकर ये बिचौलिये ही उसे बाजार में महंगे दाम पर बेचते हैं। होत यह है कि कारोबार का ज्यादातर लाभांश बिचौलिये की जेब में चला जाता है और किसान कर्ज के बोझ से निकल ही नहीं पाता। जिस वर्ष या फसली सीजन में उसकी फसल खराब हो जाती है। वह उस बार अपना कर्ज नहीं चुका पाता और उसकी अर्थव्यवस्था हिल जाती है।