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क्यों याद रहेंगे अटल जी

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atal bihari vajpayee
atal bihari vajpayee
  • राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन वाले 12 घटक दलों वाली सरकार का नेतृत्व,
  • पहली बार किसी गैर कांग्रेसी सरकार का कार्यकाल पूरा करना,
  • सच्चे अर्थों में पाकिस्तान से संबंध सुधारने की पहल,
  • विदेश नीति को व्यावहारिक दिशा,
  • सीना ठोक कर परमाणु परीक्षण,
  • देश पर तमाम वैश्विक प्रतिबंध,
  • अमेरिका से धमकियां फिर भी आर्थिक मामलों में नयी कुलाचें,
  • कारगिल में घुसपैठियों को बिना नियंत्रण रेखा पार किये सीमा के उस पार ढकेलना,
  • कश्मीर की जनता को पहली बार इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत का संदेश
  • संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण,
  • पहली बार सकल घरेलू उत्पाद का 8 प्रतिशत का आंकड़ा,
  • पहली बार इतने सस्ते होम लोन,
  • लाखों लोगों को घर देने का साकार सपना,
  • निजी क्षेत्र का बूम,
  • विश्वविद्यालयों ने पास होने वाले सामान्य ग्रेजुएट को भी कॉल सेंटर या अन्य निजी प्रतिष्ठानों में 20,000 की नौकरी,
  • 5000 किलोमीटर और 4 से 6 लेन वाला स्वर्णिम चतुर्भुज,
  • देश के गांवों में 5 लाख किलोमीटर सड़कों का जाल,
  • शेरशाह सूरी के बाद पहली बार इतने व्यापक पैमाने पर देश में इतनी बड़ी मात्रा में सड़कों का जाल,
  • बच्चों को मुफ्त प्राथमिक शिक्षा,
  • नयी टेलीकॉम नीति और गरीबों की टेलीफोन-मोबाइल फोन तक पहुंच,
  • दिल्ली मेट्रो,
  • नदियों को जोड़ने का ब्लूप्रिंट,
  • चंद्रयान मिशन,
  • भारतीय राजनीति के भीष्मपितामह का औहदा
  • राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की नर्सरी से निकलने के बावजूद अन्य राजनीतिक दलों के साथ तालमेल और सामंजस्य
  • विपक्षी दलों के नेताओं का सम्मान और उनके मन में अपने प्रति सम्मान
  • बाबरी मस्जिद विध्वंस का खुल कर विरोध

 

  • सत्ता में रहते हुए विरोधी दलों के नेताओं की सुरक्षा की पूरी चिंता,ये वे तथ्य हैं जिन्होंने हमारे दिलों में अटल बिहारी वाजपेयी की अटल रेखा खींची है। वे मानस पटल की स्मृतियों में हमेशा के लिए अमर रहेंगे। उन्होंने देश की राजनीति में ऐसे स्वस्थ मानक स्थापित किये जिसे अन्य दलों को भी स्वीकार करना चाहिए और अन्य दल ऐसा करें या न करें कम से उनकी अपनी पार्टी के अग्रजों को अवश्य आत्मसात् करना चाहिए। वास्तविक अर्थों में वह नेहरू, लाल बहादुर, इंदिरा गांधी के बाद भारतीय राजनीति के पुरोधा हैं। आज से 100-50 साल बाद जब कोई विद्वान भारतीय राजनीति पर आलेख लिखेगा तो मेरा विश्वास है उन्हें वहीं जगह मिलेगी जो ब्रिटिश भारत और तत्कालीन आजाद भारत में नेहरू को मिली थी।
  • डर इस बात का है उनके अग्रज उनका दैवीकरण करके उसका प्रयोग सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने में ही न करें, बल्कि उनके आदर्शों से भारत में एक स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना करें। क्योंकि देश को अभी विकास का बहुत लंबा सफर तय करना है और यह स्वस्थ लोकतंत्र से हो तो अच्छा है। भले ही अटल जी सफर समाप्त हो गया हो लेकिन उनका युग समाप्त नहीं होना चाहिए।