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लोकसभा चुनाव : चलेगा मोदी का जादू या होगी राहुल की ताजपोशी!

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lok sabha election 2019

lok sabha election 2019 को लेकर चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों का दौर शुरू हो चुका है और बड़ी बात ये है कि ये सर्वेक्षण (India today survey) सत्ताधारी राजनीतिक दल (politcal parties) BJP के लिए खुशखबरी कतई नहीं कहे जा सकते। अभी हाल में इंडिया टुडे (India today survey) के चुनाव पूर्व सर्वेक्षण के अनुसार 2014 में पूर्ण बहुमत हासिल government बनाने वाली BJP को 2019 में जोरदार झटका लग सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण बताया गया है कि बहुमत के अहंकार में उसने अपने सहयोग दलों की परवाह नहीं की जिस वजह से उसे अपने पुराने सहयोगियों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। अपनी सबसे पुरानी सहयोगी महाराष्ट्र में शिवसेना अगले लोकसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है।
lok sabha election 2019 इसी वर्ष मार्च में टीडीपी एक चंद्रबाबू नायडू गठबंधन धर्म का पालन न करने और ओछे व्यवहार का आरोप लगाकर NDA से किनारा चुके हैं। पंजाब में शिरोमणि अकाली से मनमुटाव की स्थिति चल रही है। NDA छोड़ कर गये और पुन: वापसी करने वाले जेडीयू के नीतीश कुमार के भी BJP से बहुत अच्छे रिश्ते नहीं बताये जा रहे हैं। 2013 में सत्ता में आने के बाद BJP ने 2015 तक किसी भी सहयोगी की सुध नहीं ली और जब चुनाव सिर पर खड़े हैं तो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह देश भर में जनसंपर्क यात्राओं का दौर चला रहे हैं। इसके अलावा एक कारण और भी विपक्ष में राहुल गांधी की लोकप्रियता में लगातार इजाफा हो रहा है । lok sabha election 2019

लोकसभा चुनावों को लेकर मनाना होगा रूठे साथियों को

lok sabha election 2019 को लेकर हालिया सर्वेक्षण बता रहे हैं कि अगर BJP को अगले चुनाव में वापसी करनी है तो उसे अपने सभी रूठे साथियों को मनाना पड़ेगा। क्योंकि सर्वे के नतीजों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi गांधी की लोकप्रियता में जोरदार इजाफा हुआ है। सर्वे के अनुसार जहां prime minister के रूप में नरेंद्र मोदी अभी भी 49 प्रतिशत लोगों की पसंद बने हुए हैं वहीं दूसरी ओर 27 प्रतिशत लोगों ने Rahul Gandhi गांधी को पीएम पद की पसंद बताया है। lok sabha election 2019

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lok sabha election 2019 : Rahul Gandhi की बढ़ती रेटिंग BJP के लिए चिंता का विषय

lok sabha election 2019

चिंता की बात यह नहीं है कि Rahul Gandhi को इतने लोग पीएम पद के लिए पसंद कर रहे हैं, बल्कि BJP को चिंता इस वजह से करनी चाहिए कि लोकप्रियता के मामले में Rahul Gandhi गांधी अब देश के मौजूदा prime minister नरेंद्र मोदी के नजदीक पहुंच रहे हैं। सर्वे के अनुसार दोनों के बीच लोकप्रियता का फासला 22 प्रतिशत अंकों का रह गया है जबकि जनवरी 2017 में यह आंकड़ा 55 प्रतिशत अंक का था। चिंता की दूसरी बात यह है कि BJP की विपक्षी पार्टियां मिलकर महागठबंधन बनाने का प्रयास कर रही हैं।

lok sabha election 2019 : चलेगा अंकगणित का खेल

2019 में NDA और यूपीए दोनों में किसी को भी बहुमत न मिलने की स्थिति में lok sabha election 2019 और government का गठन एक ऐसी स्थिति बन जायेगी जिसमें व्यक्तित्व गौड़ हो जायेगा और अंकगणित का खेल चलेगा। lok sabha election 2019

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क्या कहते हैं चुनाव विशेषज्ञ

lok sabha election 2019 चुनाव विशेषज्ञ बताते हैं कि चुनाव जीतने को लेकर जिन संसाधनों की जरूरत है उनमें BJP बाजी मारती दिखायी दे रही है। BJP के पास 4 एम हैं। ये हैं मोदी, मशीन, मीडिया और मनी। इनसे लड़ने के लिए कांग्रेस को 3 पी चाहिए। ये हैं प्रिंसिपल, पॉलिसी और पॉलिटिकल रोडमैप। खास बात यह है कि 3 पी कांग्रेस और यूपीए के पास किसी के पास भी दिखायी नहीं दे रहे हैं। lok sabha election 2019

वर्तमान में NDA के घटक दल

BJP, एजीपी, बीपएफ, डीएमडीके, एचजेसी, जेडी (यू), एलजेपी, एमडीएमके, एनपीएफ, पीएमके, एनपीपी, आरपीआई (ए), अकाली दल, एसडीएफ, एसएस। lok sabha election 2019

वर्तमान में यूपीए के घटक दल

कांग्रेस, एआईएमआईएम, डीएमके, जेडी (एस), एनसी, जेएमएम, केसी (एम), आईयूएमएल, एनसीपी, आरजेडी, आरएलडी lok sabha election 2019
अन्य दल : आप, एआईएडीएमके, एआईएफबी, सीपीआई, एआईयूडीएफ, बीजेडी, बीएसपी, सीपीआई (एम), आईएनएलडी, जेकेपीडीपी, केसी (जे), एमएनएस, एनएलपी, आरएसपी, एसपी, टीडीपी, टीआरएस, वाईएसआरसीपी, आईएनडी lok sabha election 2019

BJP के लिए क्यों जरूरी है रूठों को मनाना

lok sabha election 2019

lok sabha election 2019 को लेकर अगर महागठबंधन सफलतापूर्वक सामने आता है तो इसमें कांग्रेस, त्रिणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और जनता दल (एस) का रहना तय है। अगर ऐसा हुआ तो यह गठबंधन चुनाव में 224 सीट तक जीत सकता है। इस स्थिति में NDA 228 सीट तक सिमट जायेगा जिससे त्रिशंकु संसद के आसार बहुत प्रबल हो जायेंगे। इस स्थिति में BJP 194 सीट तक सिमट जायेगी। हालांकि इस स्थिति में भी यह सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी होगी और government बनाने के लिए इसे अन्य दलों पर निर्भर रहना होगा। इस स्थिति में सबसे ज्यादा झटका मोदी की वोट जिताऊ नेता के रूप में उनकी छवि लगेगा। हो सकता है NDA के सहयोग मोदी को prime minister के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार न हों। पार्टियों की भीड़ वाली government का नेतृत्व करने को मोदी कभी तैयार नहीं होंगे और अगर पीएम बन भी गये तो government चलाने में उन्हें कदम-कदम पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। lok sabha election 2019

युवाओं में नहीं है पहले की तरह दीवानापन

Government की तमाम उपलब्धियों के बावजूद युवा वर्ग इस बार मोदी को लेकर उस तरह से दीवना नहीं है जैसा 2013-14 में था। पार्टी के सगंठन और बाह्य स्तर पर मोदी की छवि को इस तरह से प्रचारित किया जा रहा था मानो कोई देवता देश की prime minister की कुर्सी को सुशोभित करने की तैयारी में हो। उसे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय-क्षेत्रीय स्तर की तमाम समस्याओं के एकमात्र समाधान के रूप में पेश किया जा रहा था। lok sabha election 2019

मजबूत चुनौती बनकर उभर रहे हैं Rahul Gandhi

lok sabha election 2019

lok sabha election 2019 को लेकर इंडिया टुडे के सर्वे के अनुसार अब से डेढ़ साल पहले तक जनवरी 2017 में मोदी की लोकप्रियता रेटिंग जहां 65 प्रतिशत थी वहीं इस वर्ष जुलाई में यह घटकर 49 रह गयी है। वहीं दूसरी ओर डेढ़ साल पहले Rahul Gandhi गांधी को लोकप्रियता रेटिंग जहां 10 प्रतिशत थी वहीं अब यह बढ़कर 27 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में Rahul Gandhi एक मजबूत चुनौती के रूप में उभर रहे हैं। हालांकि मोदी की रेटिंग यह बता रही है कि prime minister के रूप में जनता के बीच अभी तक वह सबसे स्वीकार्य नेता हैं। lok sabha election 2019

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भ्रष्टाचार पर प्रहार से सबसे ज्यादा खुश हैं लोग

lok sabha election 2019 को लेकर इंडिया टुडे के सर्वे के अनुसार लोग मोदी से सबसे ज्यादा खुश भ्रष्टाचार पर प्रहार को लेकर हैं। यह कार्य उन्होंने नोटबंदी के जरिये किया। लेकिन बेरोजगारी और लगातार बढ़ रही महंगाई को लेकर खासे नाराज हैं। उनकी जीएसटी, स्वच्छ भारत मिशन और देश में आधारभूत ढांचे के विकास योजनाओं से भी लोग खासे प्रभावित हैं लेकिन जनधन योजना, डिजिटल इंडिया और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया ठंडी रही है। lok sabha election 2019

lok sabha election 2019 पर BJP के लिए
वोट महंगे कर सकती है महंगाई

लगातार ब‍ढ़ रहे जरूरी वस्तुओं के दाम भी मोदी government के खतरनाक साबित हो सकते हैं। lok sabha election 2019 को लेकर बेरोजगारी नियंत्रण और कालेधन पर government की नीतियों और रवैये को लेकर देश का काफी बड़ा तबका मोदी के ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ वाले नारे को चुनावी जुमला मानने लगा है। हालांकि जनता के साथ संवाद की कला मोदी की वह ताकत बनी हुई है जो उन्हें देश के अन्य राजनेताओं से अलग करती है। अभी हाल में गुजरात और कर्नाटक के चुनावों में यह बात साबित हुई है। मोदी को अपने भाषणों से लोगों खासकर युवाओं को अपने साथ जोड़ने में महारथ हासिल है। lok sabha election 2019

मोदी को ऐसे मात देने की तैयारी में विपक्ष

lok sabha election 2019 को लेकर प्रश्न यह उठता है कि 2019 का चुनाव मोदी बनाम Rahul Gandhi गांधी होगा या NDA बनाम यूपीए? कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्ष ने जिस एकता का प्रदर्शन किया वह विपक्ष भविष्य में भी संगठित होकर किसी एक झंडे या बैनर तले चुनाव लड़ पायेगा? यह बात तो तय कि अगले लोकसभा चुनाव में भी BJP, NDA, कांग्रेस या यूपीए में मोदी के कद का कोई भी नेता नहीं होगा। ऐसे में विपक्ष के लिए Rahul Gandhi गांधी को prime minister पद का उम्मीदवार घोषित कर उसे व्यक्तित्व और अमेरकी प्रणाली आधारित चुनाव लड़ना बेहतर रहेगा या बिना prime minister पद का उम्मीदवार घोषित किये मोदी के खिलाफ महागठबंधन को खड़ा करना। lok sabha election 2019

बिना जनरल घोषित किये युद्ध लड़ेगी सेना

lok sabha election 2019 को लेकर बिना नेता घोषित किये चुनाव लड़ने में विपक्षियों का दूसरा लाभ यह भी होगा कि अहम का टकराव होने की संभावना समाप्त हो जायेगी। महागठबंधन में Rahul Gandhi गांधी, ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार, मायावती और अखिलेश यादव आदि की अपनी महत्वाकांक्षायें हैं। भविष्य में ये नेता prime minister पद के दावेदार के रूप में सामने आ सकते हैं। Rahul Gandhi को पहले ही prime minister पद का दावेदार घोषित करना महागठबंधन की एकता में सबसे बड़ी रुकावट बन सकता है। lok sabha election 2019

दोनों एलायंस ऐसे कर रहे चुनाव की तैयारियां

lok sabha election 2019

lok sabha election 2019 अगले लोकसभा चुनाव को लेकर NDA और यूपीए दोनों की अपनी-अपनी रणनीतियां हैं। यूपीए जहां बिखरे विपक्ष को सगंठित करने का प्रयास कर रहा है वहीं NDA नये साथियों की तलाश में है। हाल की घटनाओं में सामने आया है कि BJP ने NDA में बीजू जनता दल के नवीन पटनायक, तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) के के. चंद्रशेखर, वाईएसआर कांग्रेस के वाई.एस. जगमोहन रेड्डी और एआईएडीएमके को अपने खेमे में लाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसके अपने BJP ने अपने रूठे हुए पुराने साथियों को भी संतुष्ट करने में सफलता पायी है। जेडी(यू) के हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा उपसभापति निर्वाचित करना और इसमें 4 नये साथियों का समर्थन NDA की मजबूती का स्पष्ट संकेत दे रहा है। lok sabha election 2019

दोधारी तलवार पर खड़ा है NDA

lok sabha election 2019 को लेकर इन NDA के पास एक सकारात्मक और एक नकारात्मक पक्ष है। जिसका उसे सामना करना पड़ेगा। सकारात्मक पक्ष यह है कि उसे मोदी जैसे व्यक्तित्व का नेतृत्व हासिल है और नकारात्मक यह कि मोदी का नेतृत्व अभी सत्ता में है, इस वजह से पैदा हुई एंटी इंकबेंसी का असर अगर BJP पर पड़ेगा तो NDA के घटल दल भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। इस तरह से मोदी इस युद्ध का वह विशाल हाथी साबित हो सकते हैं तो आगे चले तो अपनी सेना को जोरदार जीत दिला सकते हैं लेकिन अगर डगमगाये या पीछे की ओर मुड़े तो उनके पांव तले ही अपने ही सिपाही आ सकते हैं जो अपनी ही सेना के लिए हानिकारक हो सकते हैं। lok sabha election 2019

बिन दूल्हे की बारात बनेगा महागठबंधन

lok sabha election 2019 को लेकर बेरोजगारी, महंगाई और हाल ही में सामने आई बैंकिंग क्षेत्र में भ्रष्टाचार की घटनाओं को लेकर विपक्ष उन्हें घेरने में कोई कसर बाकी नहीं रखेगा। लेकिन समस्या यह है कि मोदी के खिलाफ बनने वाले महागठबंधन में किसी एक सर्वमान्य नेता की गैर-मौजूदगी से यह एक बिन दूल्हे की बारात नजर आयेगा। और BJP नेता इस बात का उल्लेख बार-बार करते रहते हैं। lok sabha election 2019
lok sabha election 2019 के पहले गठबंधनों के समीकरण और चुनाव के बाद उसकी अंकगणित चाहे कुछ भी हो लेकिन एक बात तो तय है कि प्रिंसिपल, पॉलिसी और पॉलिटिकल रोडमैप के मामले में BJP विपक्षी पार्टियों पर बीस साबित होगी और सत्ताधारी दल होने के नाते उसे राज्य की मशीनरी, मनी और मैकेनिज्म का भी लाभ होगा। lok sabha election 2019

राज्यों के चुनाव स्पष्ट करेंगे स्थिति

हालांकि lok sabha election 2019 को लेकर राजनीतिक परिदृश्य इस वर्ष के अंत में होने वाले रास्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणामों से और अधिक स्पष्ट हो जायेगा। लोकसभा चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कांग्रेस को कम से कम 2 राज्यों में अपनी government का गठन करना होगा। lok sabha election 2019

Rahul Gandhi का जनेऊ बनाम BJP का हिंदुत्व

lok sabha election 2019 महागठबंधन के निर्माण के साथ ही कांग्रेस के सामने एक और बड़ा प्रश्न सामने आ रहा है। BJP और उसके सहयोगियों वाले विपक्ष को मात देने के लिए वे अब तिलकधारी-जनेऊधारी ब्राह्मण में तब्दील हो चुके हैं, मंदिर-मंदिर चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन उनकी पार्टी के अन्य बड़े घटक दलों के नेताओं की राजनीति दलित, पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम पर टिकी है। ऐसे में वे पूरे देश के मुख्यधारा के हिंदुओं को अपने पाले में कैसे पायेंगे यह भी एक देखने वाली बात होगी। NDA के हिंदुत्ववादी एजेंडे से पार पाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन रहेगी। lok sabha election 2019