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आरएसएस : जो है नाम वाला, वही तो बदनाम है

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RSS
Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS)

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानि RSS दुनिया के सबसे बदनाम और सफलतम संगठनों में से एक। कहने को यह संगठन राजनीति में भाग नहीं लेता लेकिन देश की राजनीति में इसका कितना प्रभाव है कि वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू, संवैधानिक और गैर संवैधानिक पदों पर बैठे तमाम राजनेता, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल संघ की शाखाओं से प्रशिक्षित होकर निकले हैं। हालात ये हैं कि वर्तमान के राजनीतिक परिदृश्य में संघ राष्ट्रवाद और देशप्रेम का पर्याय बना हुआ है। समाज और मीडिया के बड़े स्तर पर भी इस तथ्य को स्वीकार कर लिया गया है। जो RSS की विचारधारा का विरोध करते हैं उनके ऊपर बड़ी चतुराई से राष्ट्रविरोधी और हिंदूविरोधी होने का लेबल चस्पा कर दिया जाता है। RSS

RSS : कुछ है जो दूसरों से अलग करता है

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के व्यवहार में दोहरापन इस तरह से समझा जा सकता है जैसे इस संगठन ने 1925 में देश के स्वाधीनता संघर्ष (indian freedom struggle) को भी मान्यता नहीं दी बल्कि इसे सिर्फ एक राजनीतिक लड़ाई माना। और वर्तमान में RSS की अनुषंगी संस्था BJP देश में सत्तासीन है 20 से अधिक राज्यों में BJP की सरकारें काम कर रही हैं। संगठन मंत्री के तौर पर संघ के पदाधिकारी राजनीतिक संगठन BJP में काम करता है। इस नाते वह न सिर्फ दोनों संगठनों के बीच सेतु का काम करता है बल्कि सत्ताधारी पार्टी और सत्ताधारियों दोनों पर लगाम कसता है। RSS
सिद्धांत में संघ राजनीति को तुच्छ मानता है। आजादी की लड़ाई को लेकर उनका मानना था जब तक समाज और समाज में रहने वाले लोगों का हिंदू संस्कृति के माध्यम से उद्धार नहीं होगा, तब तक यह आंदोलन सिर्फ राजनीतिक आजादी बनकर रह जायेगा। RSS

वर्तमान दौर संघ का है ये हालात तब हैं जब इस संगठन ने राजनीतिक गतिविधियों में शामिल न होने की लिखित गारंटी दी है। 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या और उसमें संघ से जुड़ाव के पुख्ता होने के बाद इसे प्रतिबंधित कर दिया गया और राजनीति में भाग न लेने का बांड हस्ताक्षर कराया गया। यह बांड तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के समक्ष संघ के तत्कालीन प्रमुख माधवराव सदाशिव गोलवलकर ने साइन किया था। तब से इस संगठन ने सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक गतिविधियों का चोला पहन लिया। RSS

हिंदू हितों के लिए हुई थी RSS की स्थापना

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दरअसल संघ और राष्ट्रवाद आज जो एक दूसरे का पर्याय इसका मूल इस संगठन के निर्माण में ही छिपा हुआ है। 1925 में डॉ. केशव बलिमार हेडगवार ने इस संगठन की स्थापना हिंदू हितों की रक्षा के लिए की थी न कि देश को आजादी दिलाने के लिए। हेडगवार ने एक साक्षात्कार में कहा था संघ का उद्देश्य अनुशासित, देशप्रेम से ओतप्रोत और संस्कारी व्यक्ति का निर्माण करना है। RSS

आखिर गोडसे ने गांधी जी को क्यों मारा?

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का जो नारा देश को दे रहे हैं उसका मूल भी स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में कहीं छिपा हुआ है। गांधी के आंदोलन का केंद्रबिंदु जहां भारत की स्वाधीनता, ब्रिटिश शासन से संघर्ष और समाज के हर तबके का सर्वांगीण विकास था वहीं 1925 के बाद से संघ के लिए वह पूरी तरह से हिंदू उत्थान से जुड़ गया। यही कारण रहा जब 15 अगस्त, 1947 को पूरे देश में स्वाधीनता की सलामी तिरंगे को दी जा रही थी पुणे में यही सलामी स्वास्तिक के निशान वाले भगवा झंडे को दी गयी। RSSवर्तमान दौर में जो हम कांग्रेस का पराभव और संघ एवं भाजपा का जो स्वर्णिम युग देख रहे हैं यह दरअसल भगवा विचारधारा का उत्कर्ष है और गांधी के पराभव का युग है। दोनों में राजनीतिक संघर्ष तो है लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं है। संघ जिस हिंदू श्रेष्ठता की बात करता रहा है वास्तव में आज के दौर में वैश्विक गांव बन चुके भारत में यह संभव नहीं दिखता। देश के 20 प्रतिशत मुसलमान जनसंख्या देश की हकीकत हैं। जिनको साथ लिये बिना न तो राष्ट्र विकसित हो सकता है और ना ही हिंदू उत्थान का सपना।

RSS भले ही संघ सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका उस तरह से न निभा पा रहा हो लेकिन अपने पदाधिकारियों को अपने राजनीतिक संगठन BJP में भेजकर अपनी महात्वाकांक्षाओं को पूरा करने का भरसक प्रयास किया और कर रहा है और उसमें सफल भी हो रहा है। RSS की BJP के साथ समन्वय बैठकें, अपने पदाधिकारी की संगठन मंत्री के रूप में नियुक्ति और पार्टी में उसका हस्तक्षेप संघ के उन प्रयासों का अहम हिस्सा हैं जिनके तहत वह न सिर्फ पार्टी पर नियंत्रण रखता है बल्कि देश के शासन पर प्रभाव और नियंत्रण भी रखता है।

इस क्रम में संघ के हाथ में तमाम हीरे हाथ लगे हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गोविंदाचार्य, कप्तान सिंह सोलंकी, रामलला जैसे नेता दोनों संगठनों के बीच सेतु का कार्य करके ही अपने वैभव के चरम पर पहुंचे हैं। RSS 1951 में संघ के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर जनसंघ का निर्माण करने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अग्रजों दीनदयाल उपाध्याय, नानाजी देशमुख, बलराज मधोक, भाई महावीर, सुंदरसिंह भंडारी, जगन्नाथराव जोशी, लालकृष्ण आडवाणी, कुशाभाऊ ठाकरे, रामभाऊ गोडबोले, गोपालराव ठाकुर और अटल बिहारी वाजपेयी ने उनकी परंपरा को बखूबी आगे बढ़ाया है। कभी संघ के प्रचारक रहे ये लोग समकालीन भारतीय राजनीति के सफल नेताओं में शुमार हुए। RSS

तेजी से बढ़ रही राहुल की लोकप्रियता

देश के बीस राज्यों में BJP और उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं। आज 20 से ज्यादा राज्यों में BJP की सरकार हैं। इनमें ज्यादातर राज्यों के मुख्यमंत्री संघ से सीधे जुड़े रहे हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के त्रिवेंद्र सिंह रावत, हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर, महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, झारखंड के रघुवरदास, त्रिपुरा के विप्लब कुमार देव, हिमाचल प्रदेश के जयराम ठाकुर आदि शामिल हैं। वहीं केंद्र की मोदी सरकार में भी स्वयंसेवक मंत्रियों की लंबी लिस्ट है। RSS
हालांकि संघ को दोहरेपन या संशय की निगाहों से देखना ही ठीक नहीं होगा। आजादी के बाद संघ ने अपने सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यों से मुसीबत के समय देश और समाज को सहारा दिया है। RSS
1947 में बंटवारे के समय संघ की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। कश्मीर पर पाकिस्तान की सेना ने आक्रमण कर दिया था और देश के सामने विकट स्थिति थी। ऐसे में संघ के स्वयंसेवकों ने कश्मीर को पाकिस्तान के हाथ में जाने से बचाने की लिए जान दी। RSS

  • पाकिस्तान से जान बचाकर भारत आये हिंदू परिवारों के लिए शरणार्थी कैंप, राहत शिविर लगाये। RSS
  • 1954-55 में संघ स्वयंसेवकों ने जगन्नाथ राव जोशी के नेतृत्व में गोवा मुक्ति आंदोलन में हिस्सा लिया। 1961 में सैन्य कार्रवाई के द्वारा गोवा को मुक्त कराया गया। RSS
  • 1962 में चीन युद्ध के समय सेना और सरकार का भरपूर सहयोग किया। RSS
  • 1963 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। RSS
  • 1965 में पाकिस्तान से युद्ध के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आह्वान स्वयंसेवकों ने कानून-व्यवस्था संभालने में प्रशासन का सहयोग किया। घायल सैनिकों के लिए रक्तदान शिविर लगाये। कश्मीर की हवाई पट्टी से बर्फ हटाने का काम किया। RSS
  • 1975 से 77 के बीच देश में लगे आपातकाल के दौरान नया राजनीतिक आंदोलन संघ ने ही खड़ा किया। जब ज्यादातर बड़े राजनीतिक नेता जेलों में बंद थे तो स्वयंसेवकों ने तमाम राजनीतिक पार्टियों के बीच संवाद सूत्र का काम करके जनता पार्टी बनाने में भूमिका निभाई। परिणाम यह हुआ कि तमाम पार्टियों का विलय हुआ नयी जनता पार्टी का गठन हुआ। इसने सरकार बनाई। बाद में यह पार्टी भारतीय जनता पार्टी के रूप में सामने आई। RSS
  • भारतीय मजदूर संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, शिक्षा भारती, एकल विद्यालय, स्वदेशी जागरण मंच, विद्या भारती, वनवासी कल्याण आश्रम, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच आदि RSS की अनुषंगी संस्थायें हैं। RSS
  • देश के हर कोने में विद्या मंदिर, शिशु मंदिर और ज्ञान मंदिर स्कूलों का संचालन RSS विचारधारा के लोगों द्वारा संचालित। इनके पाठ्यक्रमों, स्कूली गतिविधियों में संघ और उसके पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों की सीधी भूमिका होती है। इन स्कूलों में देश के 30 लाख छात्र-छात्रायें शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। RSS

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