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capf : केंद्रीय बलों को झाड़ू लगाने का आदेश दे रहे कलेक्टर साहब

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capf हमारे देश में व्यक्ति, सरकार, हालात और मिजाज निश्चित हो या नहीं लेकिन यह निश्चत है कि साल में एक बार सर्दी आयेगी, सर्दी के मौसम के बाद गर्मी और उसके बाद बारिश। हर मौसम अपने साथ कुछ निश्चिततायें लेकर आता है जैसे उत्तर भारत में सर्दी इतनी पड़ती है कि तमाम लोग ठंड से मर जाते हैं। उसके बाद गर्मी इतनी कि लू से मरने वाले लोगों का आंकड़े सामने आने लगते हैं। लोगों को बचाने के लिए प्रशासन स्तर पर तमाम उपाय करने पड़ते हैं। गरीबों को कंबल, स्वेटर आदि उपलब्ध कराता है, जगह-जगह अलाव आदि। इसी तरह गर्मी में मीडिया, समाज के स्तर पर उपाय किये जाते हैं जैसे घर से निकलते समय नीबू पानी पियें, सिर ढक कर रखें। उसके बाद शुरू होती है आंकड़ों की बहस, गर्मी से मरने वालों की तादाद, सर्दी से मरने वालों की संख्या पर बहस। capf

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capf लेकिन एक मौसम ऐसा है जो हर साल देश के कुछ स्थानों पर ऐसे हालात पैदा कर देता है जिसमें बहस की गुंजाइश नहीं होती। इसमें राज्य को कार्रवाई करनी पड़ती है। तमाम फंड जुटाना पड़ता है। लोगों से, अन्य राज्यों से, विदेशों से, केंद्र से आदि। हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि लाखों लोगों के जान के लाले पड़ जाते हैं, लोगों को विस्थापित होना पड़ता है, भुखमरी के हालात पैदा हो जाते हैं, महामारी फैलने का डर होता है। इसकी बेरहम मार से स्थानीय प्रशासन भी बेबस होता और पुलिस भी। और वो बेरहम मौसम है बारिश का। हर साल देश के कुछ राज्यों को बारिश की वजह से बाढ़ का सामना करना ही पड़ता है। capf kerala food
capf इससे पैदा हुए हालात से निपटने में डीएम साहब भी लाचार होते हैं और एसपी साहब भी। याद आती है केंद्र की। capf kerala food
capf केंद्र इसमें एनडीआरएफ, सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों (central police forces) की मशीनरी प्रयोग करता है। इतने बड़े स्तर पर आपदा आयी है तो राज्य की मशीनरी का फेल होना लाजमी है, इसे समझा जा सकता है। एनडीआरएफ, वायुसेना, नेवी, सुरक्षा बलों के जवान कई बार भीषण परिस्थियों में लोगों को बचाकर निकालते हैं। वहां तक रसद पहुंचाते हैं। ये बल ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि ये विपरीत परिस्थितियों में भी कार्य करने का जोखिम उठा सकते हैं। इन सुरक्षा बलों की ट्रेनिंग, कमांड और प्रशासन के साथ सख्त विशेष नियमावली इनको विपरीत परिस्थितियों में कार्य करने के लिए और किसी भी चुनौती का डटकर मुकाबला करने के लिए तैयार रखती है! सुरक्षा बल देश के अंदर कानून और शांति व्यवस्था बनाये रखते हैं बल्कि मुसीबत के समय आपदाग्रस्त नागरिकों को मानवीय सहायता उपलब्ध कराते हैं। ना केवल हजारों नागरिकों की जान बचाते हैं बल्कि आपदा की योजना और उसके क्रियान्वन में सिविल डिपार्टमेंट द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार और असफलता को भी दरकिनार करते हैं। capf
capf लेकिन कभी-कभी ऐसे हालात भी बन जाते हैं जब वहां का स्थानीय प्रशासन इन बलों से यह अपेक्षा भी रखने लगता है कि ये केंद्रीय बल पीड़ितों की जान बचाने, उन्हें रसद पहुंचाने, मेडिकल सहायता मुहैया कराने के बाद पीड़ितों के घरों में झाड़ू भी लगायेंगे और उन घरों की सफाई करेंगे। capf kerala food

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capf ऐसा मामला सामने आया है बाढ़ ग्रसित केरल के पथानामथिला जिले के थिरुवालू शहर में जहां के जिला कलेक्टर ने बाकयदा लिखित आदेश देकर भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल और राष्ट्रीय आपदा राहत बल्कि बचाव कार्यों में लगी हुई टुकड़ियों को घरों की साफ-सफाई करने का तुगलकी फरमान जारी किया है। 21 अगस्त को जारी एक पत्र में कलेक्टर ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इन बलों को घरों की साफ-सफाई करने के आदेश जारी किये हैं। capf kerala food
capf हालांकि ये साफ नहीं हो सका है कि कलेक्टर साहब ने ये आदेश किन परिस्थितियों में जारी किये। शायद वह जिला पुलिस को इन बलों से सुपीरियर श्रेणी में रखना चाहते हैं, तो साफ-सफाई के कामों में सिविल पुलिस या प्रशासनिक मशीनरी का प्रयोग नहीं करना चाहते हैं या उन्हें लगता है कि वे आईएएस हैं तो कमांडेंट जैसे गैर आईपीएस अफसर को ये आदेश जारी कर ये काम भी करा सकते हैं। capf
capf उन्हें या गृह मंत्रालय को ये स्पष्ट करना चाहिए कि सिविल पुलिस या म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन/काउंसिल ये काम क्यों नहीं कर सकती। या निजी संस्थाओं से साफ-सफाई क्यों नहीं करायी जा सकती। capf kerala food

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capf : ये है कलेक्टर साहब का पत्र

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capf गृह मंत्रालय को भी इस तरफ सोचना होगा कि देश की प्रथम रक्षापंक्ति में शामिल इन बलों के अफसरों की अभी तक वह हैसियत क्यों नहीं है। उन्हें प्रशासनिक अफसरों के सामने दोयम दर्ज का क्यों माना जा रहा है। विषम परिस्थियों में काम करने वाले इन बलों के सामने क्या इससे उनके मनोबल को कम करने वाली स्थिति उत्पन्न नहीं होगी? capf kerala food
capf वेतन, भत्ते, पेंशन, रैंक और शहादत के दर्जे पर ये बल पहले ही भेदभाव का शिकार हैं। कम से कम ऐसे आदेशों से उनके मनोबल का सम्मान करना क्या सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। ये वे सवाल हैं जो उठे हैं कलेक्टर साहब के इस आदेश के बाद। एक सवाल यह भी है कि क्या सरकार ने इन बलों का गठन सिर्फ यूज एंड थ्रो आधारित नीति पर किया है। शांति और व्यवस्था का काम कराओ, न तो इन्हें सैनिक का पूरा दर्जा दो और न ही सामाजिक सुरक्षा। इसी कारण 2004 से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (central police forces) को भी भारत सरकार ने आम सिविल डिपार्टमेंट घोषित करके उन्हें दी जाने वाली पेंशन से भी वंचित कर दिया है ! capf kerala food