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मोदी जी! एक कारण बता दो कि देश का सवर्ण युवा आपको वोट क्यों दे?

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नयी दिल्ली में शुरू हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत का फॉर्म्युला पेश किया है। अपने भाषण में उन्होंने कहा है कि इस बार पार्टी नरेंद्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व और मजबूत संगठन के अलावा गांव, गरीब, किसान, दलित, ओबीसी, आदिवासी और विपक्षी विभाजन की बदौलत जीत हासिल करेगी। इन सबके बीच अगर कोई नदारद है तो वह है सवर्ण। vote bank

vote bank : अब दलितों, आदिवासियों की पार्टी बन गयी है बीजेपी

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बीजेपी को अब सवर्ण वोटों की जरूरत नहीं है, क्योंकि जिस सवर्ण ने बीजेपी को बीजेपी बनाया अब वही बीजेपी दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों का पार्टी बन गयी है और इन वर्गों में अपनी वह इस प्रकार अपनी पैठ बनाने की तैयारी में है कि उससे अगर सवर्ण नराज भी हो जायें, सवर्ण वोट बैंक खिसक भी जाये तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। वह अमित शाह की जीत के संकल्प से अगले लोकसभा चुनाव में 300 से ऊपर सीटें जीतने में कामयाब हो जायेगी। यही कारण है 2014 में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र खुद को चिल्ला-चिल्लाकर गरीब, शोषित, वंचित और पिछड़े वर्ग से आने वाला चाय वाला बताते रहे। vote bank

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vote bank : सरकार बनने के बाद बदले-बदले से ‘सरकार’

सरकार बनने से पहले जहां उनके भाषणों का केंद्र बिंदु कांग्रेस और कांग्रेस सरकार की नाकामी था सरकार बनने और प्रधानमंत्री बनने के बाद अब वही स्थान ‘दलित और पिछड़ा’ जैसे शब्दों ले लिया। फिर उन्होंने आरक्षण को लेकर बयान दे डाला और मरते दम तक आरक्षण खत्म न करने की बात कह डाली। vote bank

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vote bank : एस/एसटी एक्ट को भी बदल डाला

और तो और सुप्रीम कोर्ट ने सवर्णों के हक में जिस विभाजनकारी और समाज में डर पैदा करने वाले एस/एसटी कानून को खत्म किया था, मोदी सरकार ने तत्परता दिखाते हुए उस कानून को भी संसद में पलट दिया और सवर्णों के लिए उस काले कानून को फिर लागू कर दिया। vote bank

vote bank : कुछ भूल रहे हैं ‘सरकार’

मोदी जी शायद यह भूल रहे हैं कि वह जिस पार्टी की ओर से देश के प्रधानमंत्री बने हैं उसकी आधारशिलायें और पिलर सवर्णों के कंधों पर खड़े हैं। शायद उनको अब सवर्णों के वोट बैंक की जरूरत नहीं रह गयी है। क्योंकि उन्होंने अपने भाषणों में चिल्ला-चिल्ला कर खुद को पिछड़े वर्ग का पिछड़ों का नेता बना लिया है और पूरी तरह से मान भी लिया है।vote bank

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vote bank : कभी बीजेपी को थी सवर्णों के खून की जरूरत

लेकिन उनकी पार्टी को सवर्णों के खून की जरूरत थी जब अयोध्या में राम मंदिर का आंदोलन चलाना था। सवर्णों से चंदा/फंडिंग की जरूरत थी क्योंकि पार्टी के खर्च चलाने थे। आज ये सारे काम पीछे छूट गये हैं। संत समाज का सबसे बड़ा सपना राम मंदिर सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है और वह आरक्षण को मरते दम तक खत्म होने नहीं देंगे। कूबत उनमें इतनी है नहीं कि वे देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर स्थिति में पहुंचाकर सवर्णों को निजी क्षेत्र में नौकरी दिला सकें। vote bank

vote bank : पहले ही तोड़ चुके हैं अर्थव्यवस्था की कमर

नोटबंदी और अव्यवस्थित जीएसटी से देश के उद्योग क्षेत्र की कमर वह पहले ही तोड़ चुके हैं। बस ढिंढोरा पीट रहे हैं मुद्रा लोन के आंकड़ों का, बढ़े हुए पीएफ खातों का। मुद्रा योजना के तहत 42000 रुपये का लोन नया रोजगार शुरू करने के लिए लिया जा सकता है। बढ़ते एनपीए की चिंता में बैंक वाले ये लोन देने से कतराते हैं और दसियों अड़चनें डालते हैं और अगर मिल भी गया तो इतने पैसों में वही धंधा किया जा सकता है, जिसका बखान प्रधानमंत्री अपने लिये करते रहते हैं। यानि चाय बेचने का। इस तरह की सलाह यानि चाय-पकौड़े बेचने की, वह एक टीवी इंटरव्यू में दे भी चुके हैं। vote bank

vote bank : सवर्ण युवाओं से चाय-पकौड़ा बिकवा कर ही रहूंगा

अपने निर्णयों से बीते साढ़े 4 साल में दिखा दिया है कि चाहे कुछ भी हो जाये वे देश के सवर्ण जाति के युवाओं से चाय-पकौड़े बिकवा कर ही रहेंगे। अगर नहीं बेचे तो उन्हें कहीं का नहीं छोड़ेंगे। vote bank

vote bank : कांग्रेस के पतन से ही सबक ले लें

प्रधानमंत्री जी को अब कौन समझाये कि इस देश को आजादी की लड़ाई, जिसे आपकी पार्टी का पैतृक संगठन (आरएसएस) मान्यता ही नहीं देता, उसके लिए सवर्णों ने अपना खून बहाया है। और ये खून इस वजह से नहीं बहाया गया है कि आप उनकी पीढ़ियों से चाय-पकौड़े बिकवायें। खैर हो सकता है देश के स्वाधीनता संघर्ष का आपके लिए कोई मतलब न हो, क्योंकि आपके लिए हिंदू हित ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे। लेकिन कांग्रेस के पतन से ही सबक ले लें। इतिहास गवाह है अपने परंपरागत वोट बैंक को दरकिनार कर कोई भी पार्टी लंबी दूरी तय नहीं कर सकी है। vote bank

vote bank : गंवा दिया मौका

इन सालों में आपके सामने पूरा मौका था कि आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव किये जाते। उसे कुछ मुट्ठीभर दलितों-पिछड़ों की पीढ़ियों से बाहर निकाला जाता। गरीब सवर्णों को भी आरक्षण देने की बात होती। vote bank

vote bank : वही घिसी-पिटी बातें

जिस दिन से आप प्रधानमंत्री बने उस दिन से वही 2-4 शब्द ‘चाय वाला, दलित, पिछड़ा, शोषित, वंचित, गरीब, कांग्रेस ने ये किया कांग्रेस ने वो किया’। कांग्रेस ने जो किया वो किया आपको तो कुछ करने के लिए देश की जनता ने वोट किया है। और जिन लोगों ने वोट किया है उनमें सवर्ण भी हैं। vote bank

vote bank : जनता को कंगाल करने के लिए नहीं दिया गया था वोट

नोटबंदी करके जनता को कंगाल कर देने के लिए आपको वोट नहीं दिया गया था। कुछ मुट्ठी भर लोगों के पास कालेधन को पकड़ने के लिए आपने पूरे देश को बैंकों की लाइन में लगा दिया। जरा आंखे खोलकर देखिये ज्यादार बैंकों के एटीएम, निजी संस्थानों में लगे ज्यादातर सेक्यूरिटी गार्ड सवर्ण वर्गों से हैं। अब यही काम रह गया है सवर्णों के लिए। vote bank

vote bank : अगर कुछ नहीं कर सकते तो बंटाधार तो मत करो

  • पेट्रोल-डीजल के दाम आपसे संभल नहीं रहे। क्योंकि इसके कारण अंतर्राष्ट्रीय हैं।
  • डॉलर के मुकाबले रुपया आपसे संभल नहीं रहा। क्योंकि इसके कारण भी अंतर्राष्ट्रीय हैं।
  • प्राइवेट नौकरियां आपसे दी नहीं जा रहीं। क्योंकि नया निवेश नहीं आ रहा।
  • सरकारी नौकरियां देने से आप पहले ही मना कर चुके हैं।
  • नाकाम नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था को पहले ही बेहाल कर चुके हैं। vote bank

vote bank : आखिरी में फिर वही सवाल

जिस नोटबंदी से आप फैंटम बनने चले थे, उसने सवर्णों का कितना नुकसान किया है, शायद इसके आंकड़े भी जुटाने की कोशिश नहीं की होगी। अगर की भी होगी तो चुपचाप गठरी में दबाये बैठे होंगे। आज देश में सवर्णों का जो हाल हो रहा है अब वो दिन दूर नहीं जब देश में उनकी ओर से जमीन, जंगल और पानी को बांटने की मांग उठने लगेगी। आप चुनाव में फिर से अपना 56 इंच का सीना लेकर आने वाले हैं। लेकिन उसके पहले कोई एक कारण बता दो कि देश का सवर्ण युवा आपको वोट क्यों दे? vote bank