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आखिर सोशल मीडिया पर क्यों लग रहे हैं यौन शोषण के आरोप?

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Sexual exploitation पूरी दुनिया के राजनीतिज्ञों में बैचेनी हैं और फिल्म, मीडिया एवं अन्य उद्योगों के दिग्गजों में हलचल। किसी को नहीं पता कि देखने में संस्कारी, सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित, हाई-प्रोफेशनल, वेल एजुकेटेड, व्हाइट कॉलर व्यवसाय में संलग्न नेता जी/प्रोड्यूसर/डायरेक्टर/सिंगर/पत्रकार आदि का कौन सा पुराना पाप उनकी मिट्टी पलीद करने के इंतजार में है। इस दहशत का नाम है सोशल पर छाया ‍#Metoo आंदोलन। Sexual exploitation

Sexual exploitation महिलाएं जो कभी किसी सत्ता, पैसा और शक्ति के अभिमान में डूबे किसी व्यक्ति की अनुचित यौन इच्छा का शिकार हुई हैं वे अब सोशल मीडिया के माध्यम से #metoo अभियान के तहत मुखर हो रही हैं। इस अभियान ने फिल्म और मीडिया के धुरंधरों की ही नहीं, बल्कि उच्च राजनीतिक पदों पर आसीन पदों पर बैठे लोगों की कुर्सियां हिला दी हैं। देश के केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री इसका जीता जागता उदाहरण है। जाहिर है कि मोदी सरकार भी मीटू के फेर में है। Sexual exploitation

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Sexual exploitation : मीडिया में छाया हुया है अभियान

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‘#MeToo’ अभियान सोशल मीडिया (व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर) के अलावा इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंटमीडिया में छाया हुआ है। इसने पूरी दुनिया में हंगामा मचा रखा है। इसके द्वारा महिलायें खासकर कामकाजी महिलायें अपने साथ वर्कप्लेस/ऑफिस हो रहे या हो चुके यौन उत्पीड़न/ छेड़छाड़ के मामलों को हैशटैग मीटू (#ME Too) कैम्पेन द्वारा मामले को सोशल मीडिया में उठा रही हैं। इसका शाब्दिक अर्थ निकल रहा है ME Too (मतलब मै भी या मेरे साथ भी)। देश में इस अभियान का ताजा शिकार हैं गायक और संगीतकार अनु मलिक। उनपर सोना महापात्र और श्वेता पंडित जैसी गायिकाओं समेत 4 महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाये हैं। sex exploitation

Sexual exploitation : संस्कारी बाबूजी भी आये घेरे में

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Sexual exploitation : अभिनेत्री तनुश्री दत्त द्वारा नाना पाटेकर पर लगाये यौन शोषण के आरोपों के बाद देश की जनता को सबसे ज्यादा जिस वाकये ने हिलाया है वह फिल्म उद्योग के ‘बाबूजी’ यानि आलोक नाथ। साफ-सुथरी छवि वाले आलोक नाथ पर स्क्रीनराइटर और डायरेक्टर विनता नंदा द्वारा बलात्कार के आरोप और केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर पर 20 से अधिक महिला पत्रकारों द्वारा यौन शोषण के आरोप सामने के बाद देश की जनता जनार्दन को लगने लगा है कि हमाम में सभी नंगे हैं। इमानदार वही है, जिसे मौका नहीं मिला। सभ्यता और संस्कार के आवरण में छिपा और समाजसेवा, देशभक्ति का चोला पहने जाने कौन सा व्यक्ति अपने चमकदार करियर में कौन सा पाप ढोकर आगे बढ़ रहा है। Sexual exploitation

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Sexual exploitation : ये नाम हुए हैं उजागर

Sexual exploitation इस अभियान ने फिल्म जगत की जिन बड़ी हस्तियों के नाम उजागर किये हैं उनमें विकास बहल, चेतन भगत, कैलाश खेर, रजत कपूर, आलोक नाथ, अनु मलिक, गुरुसिमरन खाम्बा और साजिद खान के नाम शामिल हैं। 2006 से अमेरिका से शुरू होने वाले इस अभियान ने छोटे पर्दे के ‘संस्कारी बाबूजी’ आलोक नाथ, निर्माता निर्देशक साजिद खान, सुभाष घई, विकास बहल, चेतन भगत, रजत कपूर, कैलाश खैर, जुल्फी सुईद, सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य, तमिल राइटर वैरामुथु आदि कई बड़ी फिल्मी हस्तियों को अपने लपेटे में ले लिया है। Sexual exploitation

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Sexual exploitation : आखिर कचहरी से भरोसेमंद कैसे हुआ ट्विटर

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Sexual exploitation अब सवाल यह उठता है कि देश में पुलिस, कचहरी, महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, कंपनियों और कॉरपोरेट प्राधिकरणों की नियामक एजेंसियों जैसी संस्थाओं के होते हुए सोशल मीडिया का सहारा क्यों ले रही हैं। यौन शोषण और छेड़छाड़ के कुछ मामले तो 20 साल से भी अधिक पुराने हैं तो फिर इतने समय बाद ये महिलाएं इन आरोपों के साथ क्यों सामने आ रही हैं। इस अभियान के तहत शिकंजे में फंसे और अन्य मठाधीशों ने महिलाओं से पूछना शुरू कर दिया है कि आप इतने समय तक चुप क्यों रहीं? आपको न्याय देने के लिये पुलिस है, कानून है, न्याय तंत्र है, आयोग हैं तो फिर बिना तथ्य और सबूत के आरोप लगाने के लिए सोशल मीडिया ही क्यों? Sexual exploitation

Sexual exploitation : कुंठा और निराशा की अभिव्यक्ति

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Sexual exploitation : दरअसल, सोशल मीडिया पर इन आरोपों के साथ सामने आने की वजह देश की आम महिला की कुंठा और निराशा है। जो अपने हक में मिल चुके तमाम कानूनों के हथियारों के बावजूद अकेली है, असहाय है। उसे पता है उसे बलात्कार, छेड़छाड़, दहेज, हिंसा के प्रतिरोध में तमाम कानूनों का अधिकार तो मिल गया है लेकिन वे सभी कानून अदालतों में गवाह और सबूत के मोहताज हैं। अदालत की देवी अंधी है और इन मामलों को साबित करने के लिए जरूरी गवाह और सबूत बहुत महंगे। Sexual exploitation

Sexual exploitation : पुलिस और सिस्टम से परेशान महिलाएं

Sexual exploitation यही वजह है कि अमेरिका से चलने वाले इस तूफान की हवा भारत पहुंच चुकी है। देश की आम महिला जानती है कि जब वह किसी बड़े नाम के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत लेकर पुलिस स्टेशन जायेगी तो पुलिस वालों का पहला सवाल उस महिला से होगा। वह सवाल उसके कपड़ों पर भी हो सकता है और आचरण पर भी। एक टूटी हुई कमजोर महिला के लिए ये सवाल बेहद क्रूर हैं। इनका जवाब बेहद कठिन। यही वजह है कि कॉरपोरेट, मीडिया, फिल्म और राजनीति में शोषण और बलात्कार के के तमाम मामले सामने ही नहीं आते हैं। क्योंकि यहां पीड़ित ही पहला अघोषित अपराधी है। Sexual exploitation

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Sexual exploitation : सोशल मीडिया से आम महिला हुई है ताकतवर

Sexual exploitation सोशल मीडिया और मीटू जैसे अभियानों ने आम महिला को ताकत दे दी है। जहां वह अपनी बात कह सकती है, लेकिन सबूत और गवाहों की मोहताज नहीं है। जहां उसे लगता है कि उसकी आवाज को हौसला मिलेगा, ताकत मिलेगी। ये महिला बनाम पुरुष का संघर्ष नहीं है। लेकिन महिला बनाम सिस्टम का द्वंद है। जिस सिस्टम में महिला भले ही कानूनी अधिकारों के परिप्रेक्ष्य में पुरुष पर भारी है लेकिन व्यवस्था के आगे बेबस है।
ये मीटू अभियान सिर्फ एक आरोप अभियान नहीं है बल्कि कुंठा और हताशा की अभिव्यक्ति है। जिसे इसे पुरुष प्रधान समाज को समझना होगा अन्यथा वास्तविक अर्थों में उसके सामाजिक संदर्भ और संस्कार दोनों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। Sexual exploitation