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पूरे देश के लिए सबक लेने की घटना है अमृतसर रेल हादसा : कलाम

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amritsar train accident
हादसे के बाद अपने परिजनों की मृत्यु पर मातम मनाते लोग।
abul kalam
abul kalam, social worker, sheohar & muzaffarpur

अमृतसर में हुए रेल हादसे को लेकर समाजसेवी अबुल कलाम का कहना है कि विभिन्न आयोजनों विशेषकर भीड़-भाड़ वाले त्योहारों में सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किये जाने की जरूरत है। इस मसले पर जितनी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की है उतनी ही जिम्मेदारी रेलवे की है वह भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा और ट्रेन की गति का ध्यान रखे।


मालूम हो कि दशहरे के त्योहार के मौके पर रावण दहन के समय अमृतसर में रेलवे ट्रैक पर 60 से ज्यादा लोगों की कटकर मौत हो गयी है। ये सभी लोग दशहरे के मौके पर रावण के पुतला दहन कार्यक्रम के लिए एकत्रित हुए थे।
कलाम ने कहा कि यह मामला सिर्फ अमृतसर, पंजाब या किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की प्रशासनिक व्यवस्था और कानून प्रबंधन को इस दुर्घटना से सबक लेना चाहिए। पहली बात रेलवे ट्रैक के किनारे प्रशासन ने इतनी भीड़ को जुटने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिया और अगर प्रशासन से अनुमति नहीं ली गयी तो भी यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि बिना अनुमति के दशहरा मेले के आयोजन कैसे होने दिया गया और इतनी भीड़ कैसे जुट गयी?

हालांकि खबरें आ रही हैं कि दशहरा मेले के आयोजकों ने प्रशासन से अनुमति ली थी और पुलिस ने मेले को लेकर कोई आपत्ति न होने की बात लिखित में दी थी। अब जब पुलिस ने अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया तो प्रशासन की ओर से रेलवे को सूचना या रेलवे फाटक के पास पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किये। कलाम ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से वहां के स्थानीय नेताओं और प्रशासन की चूक है। खासतौर से क्षेत्र के स्थानीय जन-प्रतिनिधि नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू की यह पहली जिम्मेदारी है। उन्हें इस बात की सुध पहले से रखनी चाहिये थी कि जिस जगह पर लोग दशहरा मनाने के लिये एकत्रित हो रहे हैं, वहां कुछ ही दूरी पर रेलवे फाटक है, जिससे तेज गति से रेलगाड़ियां गुजरती हैं। इसको लेकर फाटक के पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये जाने चाहिए थे।
कलाम ने कहा कि पूरे देश को इस घटना से सबक लेना चाहिए। क्योंकि देश में त्योहारों का समय चल रहा है। लोग विभिन्न आयोजनों को लेकर एकत्रित होते हैं। जहां भी भीड़-भाड़ हो वहां पर बेहद एहतियात बरती जाये। ऐसे समय में रेलवे, सुरक्षा, आतंकवादी घटनाओं आदि को ध्यान में रखकर प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था के बंदोबस्त करने चाहिए।


आने वाले समय में बिहार के वासी दीवाली और छठपूजा का आयोजन करेंगे। ऐसे में धार्मिक आयोजनों को लेकर कई जगहों पर एकत्रित होंगे। रेलगाड़ियां भरी चलेंगी। बिहार में उत्सव का माहौल रहेगा। इन उत्सवों में शासन या प्रशासन की जरा सी चूक हमारे रंग में भंग डाल सकती है। इस वजह से सरकारों और प्रशासनिक इकाइयों को सतर्क हो जाने की जरूरत है।