Home political news देश के मुसलमानों की आवाज बनेगा ‘राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार मोर्चा’ : कलाम

देश के मुसलमानों की आवाज बनेगा ‘राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार मोर्चा’ : कलाम

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भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि देश की 545 सदस्यीय लोकसभा में मात्र 22 मुसलमान सांसद हैं। वर्तमान में 16वीं लोकसभा कार्य कर रही और 1957 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि इतनी कम मात्रा में देश की संसद में मुस्लिमों को प्रतिनिधित्व मिल रहा है। यही कारण है देश का मुसलमान लगातार पिछड़ता जा रहा है यो यूं कहें कि ध्रुवीकरण की राजनीति का शिकार बन रहा है। भारतीय राजनीति में उनकी अवहेलना की जा रही है। उनके दुख दर्द को समझने की कोशिश नहीं की जा रही है। यह कहना है शिवहर लोकसभा क्षेत्र के समाजसेवी अबुल कलाम खां का। कलाम ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में मुस्लिम जनसंख्या 17.22 करोड़ है जो कि भारत की जनसंख्या का 14.23% है। उसके अनुपात में वर्तमान लोकसभा में मुसलमानों की हिस्सेदारी मात्र 4 प्रतिशत है। जिस तरह से मुसलमानों को सिर्फ एक वोट बैंक समझा जा रहा है और देश की राजनीतिक पार्टियों में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का खेल खेला जा रहा है, उससे आने वाले समय में इस वर्ग की हालत और खराब हो जाने की आशंका है। इस वजह से देश के मुसलमानों को जागरुक करने का समय आ गया है, उन्हें अपने हकों की आवाज बुलंद करनी होगी। इसके लिए जरूरी है कि देश की राजनीतिक पार्टियों पर यह दबाव बनाया जाये कि वे मुसलमानों की टिकट दें ताकि संसद और राज्य विधानसभाओं में अल्पसंख्यक वर्ग के लोग अपनी आवाज बुलंद कर सकें। उनकी समस्याओं की समझा जाये।

अपनायेंगे संघर्ष का रास्ता 

कलाम ने कहा कि अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा को लेकर वह संघर्ष का रास्ता अपनायेंगे, वह शीघ्र ही ‘राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार मोर्चा’ संगठन का गठन करेंगे। यह संगठन सामाजिक रूप से मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए काम करेगा और राजनीतिक रूप से देश की राजनीतिक पार्टियों पर यह दबाव बनायेगा कि केंद्र और राज्य विधानसभाओं के चुनावों में अधिक से अधिक संख्या में मुसलमानों को टिकट दी जाये ताकि उन्हें अल्पसंख्यकों की समस्याओं को संसद, विधानसभाओं तक पहुंचाया जा सके।

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मुसलमानों के लिए नहीं हो रहा कोई काम

कलाम ने कहा कि ध्रुवीकरण की राजनीति का सहारा लेकर सत्ता हासिल कर रही वर्तमान सरकारें मुसलमानों के लिए कोई काम नहीं कर रही हैं। उनकी शिक्षा और रोजगार की हालत बेहद खराब है। न तो उनके लिए कोई नीति है और न ही कोई बजट। हालात ये हैं कि देश मुसलमानों के स्थिति के लिए गठित की गयी सच्चर समिति की सिफारिशों पर कोई चर्चा ही नहीं की जा रही है।

कल्याण योजनाएं बनाना तो दूर, नफरत का माहौल फैलाया जा रहा है

वर्तमान में हालात ये हैं कि सरकार मुसलमानों के लिए कल्याण योजनाएं बनाना तो दूर उनके प्रति देश में नफरत का माहौल तैयार कर रही है। कई राज्यों में गाय के नाम पर मुसलमानों पर हमले हो चुके हैं। लोगों को भड़काया जा रहा है। उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है कि जैस वे इस देश के नागरिक न होकर बाहरी हैं। जबकि हमारा संविधान देश के नागरिक को समानता और स्वंत्रता का अधिकार देता है। इस अधिकार का खुलेआम मखौल उड़ाया जा रहा है।

मुसलमानों की बेहतरी के लिए काम करेंगे 

उन्होंने कहा, हम अपने संगठन के माध्यम से मुसलमानों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बेहतरी के लिए काम करेंगे, सरकारों के ऊपर उनके लिए काम करने का दबाव बनायेंगे और सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करने और उनपर बहस करने का दबाव बनायेंगे। इसके लिए हमें जो भी करना पड़ेगा हम करेंगे। अगर शांति पूर्वक तरीके से हमारी बात नहीं सुनी जायेगी तो धरना-प्रदर्शन का रास्ता अख्तियार करेंगे।

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बेहद आवश्यक है संसद/विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व 

उन्होंने कहा कि सरकारों को यह बात समझनी होगी कि मुसलमानों का संसद/विधानसभाओं में आनुपातिक प्रतिनिधित्व बेहद आवश्यक है। सरकार के सामने खड़ा होकर मुसलमान भीख नहीं मांग रहा है बल्कि देश के संविधान द्वारा प्रदत्त अपना अधिकार मांग रहा है। वह अपना विकास चाहता है, रोजगार चाहता है, अच्छा जीवन स्तर चाहता है। इसके लिए सच्चर कमेटी की सिफारिशों पर तत्काल बहस शुरू किये जाने की जरूरत है।

लिया है संघर्ष का बीड़ा

उन्होंने कहा कि इसके लिए मैंने लोगों को जागरुक करने का बीड़ा उठाया है। मैं पूरे देश की जनता से यह कहना चाहता हूं कि आबादी के इतने बड़े हिस्से की अवहेलना कर देश का समुचित और समग्र विकास नहीं किया जा सकता है। जब पूरे देश का विकास होा, हर वर्ग यहां पर खुद को सुरक्षित, संरक्षित महसूस करेगा तभी भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के सपने और संविधान के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकेगा।

देश में मुसलमानों को लेकर कुछ आंकड़े 

  • वर्तमान में चल रही 16वीं लोकसभा में कुल 22 सांसद ही हैं।
  • इसके पहले 1957 में सबसे कम सांसद आए थे। उस साल सिर्फ 23 सांसद ही थे।
  • सबसे ज्यादा मुस्लिम सांसद 1990 में थे जब कुल 49 सदस्य जीते थे।
  • देश में मुस्लिम वोटर हमारी कुल आबादी का 10.5 प्रतिशत हैं। इसका मतलब हुआ कि उनका सदन प्रतिनिधित्व सिर्फ 4.2 प्रतिशत है।
  • सबसे ज्यादा मुस्लिम सांसद बंगाल से जीतकर आए हैं। वहां से 8 मुस्लिम सांसद चुने गए हैं। ममता की पार्टी तृणमूल ने 4 मुस्लिम सदस्यों को टिकट दिया था और वे चारों जीते हैं।

  • कांग्रेस के 2 और सीपीआई के 2 मुस्लिम सांसद हैं। बिहार से 4 मुसलिम सांसद चुनकर आए हैं, जिनमें कांग्रेस, आरजेडी, एनसीपी और लोक जनशक्ति पार्टी से एक-एक सांसद है। असम से 2 मुस्लिम सांसद चुने गए हैं। दोनों ही यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट से हैं, जबकि कश्मीर से 3 सांसद हैं। केरल से भी 3 मुस्लिम सांसद हैं।
  • तमिलनाडु और आन्ध्र प्रदेश से एक-एक सांसद चुना गया है।
    उत्तर प्रदेश से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है।
  • भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी का देश है
  • 2017 में भारत मुस्लिम आबादी में नंबर एक पर आ गया है भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा मुसलमान रहते हैं।
  • एनएसएसओ के सर्वे के मुताबिक मुसलमानों का औसत प्रति व्यक्ति प्रति दिन खर्च सिर्फ 32.66 रुपए है।
  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम अल्पसंख्यक आबादी वाला देश है।
  • 2011 में हुई जनगणना के अनुसार भारत मे मुस्लिम जनसंख्या 17.22 करोड़ है जो अब काफी बड़ चुकी है।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में मुस्लिमों का जनसंख्या वृद्धि दर 24.6% है। जो 2001 के मुकाबले 5 प्रतिशत कम है।