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मोदी जी, अगर देश में काला धन था, तो इसमें मासूम जनता की क्या गलती थी

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notebandi line in india
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अगर देश में काला धन था तो ये गलती देश के शासन-प्रशासन की थी, लेकिन इसकी कीमत चुकाई आम जनता ने। आम जनता अपने सारे जरूरी काम छोड़कर दिन-रात बैंकों के सामने लाइन में खड़ी हो गयी। उनपर क्रूरता के साथ पुलिस ने डंडे चलाये। 105 लोगों ने बैंकों के सामने लाइन-लाइन में खड़े-खड़े ही दम तोड़ दिया। इसका मोदी जी ने अपने ‘मन की बात’ की कभी कोई उल्लेख नहीं किया। मुद्रा की कमी से तमाम छोटे-मोटे उद्योग-धंधे बंद हो गये। यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनें बेरोजगारों की भीड़ से लद गयीं। छोटे और मझले उद्योगों में लगी तमाम लोगों की नौकरियां चली गयीं, क्योंकि उनके मालिकों ने उन्हें वेतन देने से मना कर दिया। उनके सामने रोजी-रोटी के लाले पड़ गये। लेकिन मोदी बड़े-बड़े भाषण देते रहे। देश को विश्व की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनाने के सपने दिखाते रहे। चुनाव से पहले मोदी जी ने देश की अर्थव्यवस्था सुधारने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वह विदेशी बैंकों में जमा काले धन को वापस लाकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। लेकिन उन्होंने यह कभी नहीं कहा था वह कालेधन के नाम पर नोटबंदी करके लोगों की जेब से उनकी मेहनत से कमाई गयी जमा पूंजी बाहर निकाल लेंगे। लोगों को बैंकों की लाइन में खड़ा कर देंगे और उनपर पुलिस और बैंकिंग व्यवस्था से जुर्म करायंग।

मनमोहन सिंह ने किया बड़ा हमला

notebandi in india
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नोटबंदी (Demonetisation) के गुरुवार (8नवंबर) को 2 साल पूरे हो चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) ने नोटबंदी के 2 साल पूरे होने के मौके पर बृहस्पतिवार को नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर जोरदार निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले से भारत की अर्थव्यवस्था तबाह हो गयी। इससे देश का हर व्यक्ति नकारात्मक रूप से प्रभावित हुआ है।

नोटबंदी के बचाव में उतरे वित्त मंत्री अरुण जेटली, बोले- नोटबंदी का उद्देश्य नकदी को जब्त करना नहीं बल्कि उन्हें अर्थव्यवस्था में लेकर आना था। उन्होंने कहा कि
मनमोहन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार अपनी सनक में एक ऐसा कदम उठाया जिसने अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी। बिना किसी तैयारी के उन्होंने नोटबंदी का कदम उठाया लिया। उसके 2 साल पूरे हो गए हैं लेकिन उसके नकारात्मक प्रभाव हमारे सामने अभी तक मौजूद हैं।

‘सनक ने ले ली 100 से ज्यादा जिंदगियां’

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prime minister narendra modi

मनमोहन सिंह ने कहा, नोटबंदी का असर हर उम्र, स्त्री या पुरुष, धर्म, पेशा, हर कारोबारी पर पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसेले से 500 रुपये और एक हजार रुपये के नोट चलन से बाहर हो गए। पूर्व प्रधानमंत्री मनमनोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के एक फैसले से 35 लाख नौकरियां चली गयीं, नोट बदलवाने की लाइन में खड़े-खड़े 105 लोगों की जान चली गई।

कांग्रेस करेगी प्रदर्शन

नोटबंदी के 2 साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस देशभर में प्रदर्शन करेगी। नोटबंदी से हुई परेशानियों को याद दिलाने के लिए कांग्रेस ने सड़कों पर उतरने का फ़ैसला किया है। कांग्रेस मोदी से 7 सवाल पूछेगी और ‘मोदी जी जवाब दो’ का नारा बुलंद करेगी। आंदोलन की शुरुआत 9 नवंबर से होगी। आरबीआई ने यह भी खुलासा किया कि नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई में 7, 965 करोड़ रुपये की राशि खर्च हो  गई है। यानि की देश के काले धन को समाप्त करने की कीमत देश के आम करदाता ने 7, 965 करोड़ रुपये चुका कर अदा की।

हिमाचल आजकल के संपादक कृष्णन भानु के फेसबुक वाल से

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वे बहुत सुंदर थे। उनकी बहुत याद आती है। उनका कोई दोष नहीं था, फिर भी रुखसत कर दिए गए। काला पानी दे दिया गया। सूली पर चढ़ा दिए गए। हाय 500, हाय 1000 के सुंदर नोट ! तुम्हारे साथ हुए जुल्मों की कहानी क्रूरतम है। उस एक राजा की कहानी की तरह जो सनक में किसी निर्दोष को भी सूली पर चढ़ा देता था।
ब्रम्हांड की सबसे बड़ी ‘मुद्रा क्रांति’ को आज दो साल हो गए हैं। नोटबंदी के बाद देश भर में उपजे हालात से हर वर्ग परेशान हुआ। उस समय इसे देश में ज्यादा समर्थन नहीं मिला। नोटबंदी के बाद देश की विकास दर में गिरावट आई, बेरोजगारी बढ़ी, कारोबार ठप पड़ गया। लोगों को नकदी के लिए परेशान होना पड़ा। कई लोगों को जानें गवानी पड़ीं। नोटबन्दी के दो साल बाद हम आज भी समझ न सके हैं कि इस ऐतिहासिक मुद्रा क्रांति से देश के आमजन को लाभ हुआ या नुकसान ? इस अल्पज्ञ को कोई ज्ञानी समझा सके तो आभारी हूंगा।
काले धन की भी बात हुई, लेकिन वह अब तक गधे के सींग की भांति छुपा हुआ है। बाहर निकला हो, ऐसा दिखाई नहीं दिया, न अब दिखाई देगा।आरबीआई का खुलासा इस बात को प्रमाणित करता है। आरबीआई ने कहा था कि नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपये के करीब 99 प्रतिशत नोट वापस आए हैं। कुल 15 लाख 44 हजार करोड़ के पुराने नोट बंद हुए थे। इनमें से 15 लाख 28 हजार करोड़ रुपये की रकम बैंको में लौट आई है।

एसे चले भीड़ पर पुलिस के डंडे