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क्या होगा अगर बंद हो जायें सभी सीबीआई जांच?

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CBI
Office of CBI

CBI देश में एक अजब सी स्थिति पैदा हो रही है। राज्य सरकारें केंद्र की दखलंदाजी से बचने की कोशिश कर रही हैं। सीबीआई उन्हें उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और उनपर दबाव बनाने का औजार दिखायी दे रही है। वे अब अपनी जमीन पर इस केंद्रीय जांच एजेंसी को छापे मारने, जांच करने से रोक रहे हैं। आंध्र प्रदेश और उसके बाद पश्चिम बंगाल ने सीबीआई को अपनी जमीन में कार्रवाई करने के ‘सामान्य रजामंदी’ के अधिकार वापस ले लिये हैं। केंद्र और देश के ज्यादातर राज्यों में सत्तारूढ़ दल बीजेपी इसे विरोधियों का दुर्भावनापूर्ण कदम बता रही है। CBI

लापता सूचना

Parmanand Jha
Parmanand Jha, age 55 years, Colour Gora, Hight 5″

परमानंद झा, उम्र 55 वर्ष, लंबाई 5 फीट, 17 नवंबर से रांची बस स्टैंड से लापता हो गये हैं। उनका गांव और पोस्ट ऑफिस टटुआर, जिला दरभंगा, बिहार है। कृपया उनके मामले में कोई भी सूचना मोबाइल नं- 9899097144 पर दें। जानकारी देने वाले को उचित इनाम दिया जायेगा।

 

CBI : पैदा होने लगा है विश्वास का संकट! 

CBI
BOFORS

एक सवाल पैदा होता है कि क्या होगा अगर एक के बाद एक राज्यों की सरकारें आयकर, प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई जैसी संस्थाओं को अपने सीमाओं के अंदर काम करने से रोक दें। तो फिर बड़े भ्रष्टाचारों जैसे बिहार का चारा घोटाला, 2जी स्पेक्ट्रम, कोयला घोटाला, बोफोर्स आदि इनकी जांच कैसे होगी। बहुत सारे ऐसे मामले आते हैं जिसमें हम राज्य की पुलिस जांच पर कोई भरोसा नहीं कर पाते। जैसे अभी कुछ माह पहले गुड़गांव के रियान इंटनेशनल स्कूल में बच्चे की हत्या के मामले में हरियाणा पुलिस द्वारा की गयी जांच में बस के ड्राइवर को प्रथम दृष्टया आरोपी मानकर उसे फंसा दिया था। लेकिन बाद में बच्चे के परिजनों और जनता की मांग पर राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच कराई और सामने आया कि बच्चे की हत्या ड्राइवर ने नहीं, बल्कि एक दूसरे छात्र ने की थी। हालांकि मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
हालांकि आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल द्वारा रोक लगाने से सीबीआई की शक्तियों पर बहुत प्रभाव नहीं पड़ने जा रहा है।CBI

CBI : ये हैं सीबीआई को लेकर मजबूरियां

  • जानकारों का मानना है कि एक निश्चित राशि से ऊपर के भ्रष्टाचार के मामले सीबीआई के पास ही जाते हैं।
  • कोई बड़ा अपराध या भ्रष्टाचार होने पर राज्यों को निष्पक्ष जांच के लिए जनता के दबाव में खुद ही सीबाई के पास जांच की सिफारिश भेजनी पड़ती है।
  • कई मामलों में सुप्रीम या हाईकोर्ट ही सीबीआई जांच का आदेश देते हैं।

इन तीनों ही स्थितियों में सीबीआई को राज्य सरकार से जांच या छापेमारी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती। CBI

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CBI : दांव पर केंद्र-राज्य संबंध

CBI फिर भी सीबीआई एक केंद्रीय जांच एजेंसी है, जिसके द्वारा केंद्र सरकार राज्य सरकारों पर पर शिकंजा बनाये रखता है। लेकिन अगर इसे शुरुआत माना जाये तो कम से कम केंद्र-राज्य संबंधों के लिए तो इसे बेहतर स्थिति कतई नहीं कहा जा सकता है।
मसला शुरू होता है आंध्र पदेश के कुछ कारोबारियों के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापामारी से। इस बात से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू खासे नाराज हुए। हालांकि केंद्र सरकार की पार्टी के प्रवक्ताओं की ओर नायडू की नाराजगी का कारण यह बताया गया कि छापेमारी से प्रभावित संस्थान उनकी पार्टी तेलगू देशम के खासे करीबी हैं। CBI

CBI : बिना राज्य सरकार की सहायता के जांच नहीं कर सकते सीबीआई, इनकम टैक्स 

CBI सीबीआई और आयकर विभाग को लेकर यह स्पष्ट है कि चाहे ये कोर्ट के आदेश या किसी अन्य शक्तियों के आधार पर कार्य कर रही हों लेकिन इनकी प्रभावी कार्रवाई बिना राज्य सरकार की सहमति के संभव नहीं है। कारण है कि कार्रवाई के लिए इन्हें भी सुरक्षा चाहिए और ये सुरक्षा देना संबंधित राज्य सरकार के हाथ में ही है।
आंध्र प्रदेश में छापों के बाद चंद्रबाबू नायडू ने यही पैंतरा खेल दिया है।
लेकिन इस फैसले के अगर किसी मामले में केंद्र सरकार सीबीआई जांच का आदेश देती तो यहां की इन राज्यों की सरकारें अपने अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप मानकर इनकार कर सकती हैं। CBI

CBI : ऐसे हुई थी सीबीआई की स्थापना

CBI एक केंद्र की एक जांच एजेंसी है। इसकी स्थापना 1946 में दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिशमेंट एक्ट-1946 के जरिये की गयी है। राज्यों ने एक अनुबंध के तहत इस एजेंसी को अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई करने की अनुमति दी है। इसके दायरे में पूरे देश के 29 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश आते हैं। दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिशमेंट एक्ट-1946 के सेक्शन 6 के तहत सीबीआई को दूसरे किसी राज्य में कार्रवाई करने के लिए राज्य की लिखित अनुमति होती है।
आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने ऐसे अनुमति यानि ‘सामान्य रजामंदी’ वापस ले ली है। CBI
संविधान विशेषज्ञों के अनुसार यह मसला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं है, बल्कि इससे भी ज्यादा केंद्र राज्य संबंधों का है।

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CBI : लगते रहे हैं राजनीतिक लाभ के प्रयोग के आरोप

Lalu prasad yadav and Mulayam Singh Yadav

CBI 2009 के आम चुनाव से पहले तत्कालीन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि हमारे ऊपर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार के पास कई हाथ हैं। उसके पास सीबीआई है। केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार और उसके बाद बीजेपी नीत एनडीए सरकार पर भी राज्य सरकारें सीबीआई का दुरुपयोग करने उनको डराने और उसका राजनीतिक इस्तेमाल करने का लगाती रही हैं। CBI

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CBI जब गैर गठबंधन दल या विपक्षी पार्टियों द्वारा संचालित की जा रही राज्य सरकारों के मुखिया केंद्र पर सीबीआई के दुरुपयोग के आरोप और उसे अपनी शक्तियों के तहत प्रतिबंधित करने लगें तो इस तथ्य पर विमर्श करने की जरूरत शुरू हो जानी चाहिए है कि क्या यह मसला सिर्फ चुनावी संघर्ष तक सीमित है केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा किये जाने की जरूरत है। CBI
पूर्व में अगर हम सीबीआई के कार्यों के समीक्षा करने पर इसके राजनीतिक इस्तेमाल करने स्पष्ट उदाहरण सामने आते हैं।

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CBI यूपीए सरकार के काल में मुलायम सिंह यादव द्वारा संकट काल में समर्थन के बाद आय के अधिक संपत्ति मामले में उन्हें मिली राहत इस तर्क और तथ्य दोनों की मजबूती दे रही है। वैसे आय से अधिक संपत्ति मामले में अगर हम लालू यादव के मामले को अपवाद मान लें तो ज्यादातर पार्टी नेताओं मुकदमे अपने अंजाम तक नहीं पहुंच सके हैं। इन मामलों में सीबीआई की पहचान एक डराने और दबाव बनाने वाले संगठन के रूप में बनी हुई है। CBI