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dirty politics : नाम के लिए बदनाम उत्तर प्रदेश

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dirty politics
yogi adityanath

dirty politcs नाम ही तो बदलना है, नाम बदलने में क्या है, जिसको पहले इलाहाबाद कहते थे उसे अब प्रयागराज कहेंगे, जिसे पहले फैजाबाद कहते थे अब अयोध्या कहेंगे या जिसे पहले कानपुर देहात कहकर बुलाते थे उसे अब रमाबाई नगर कहेंगे। अगर आप ये सोच रहे हैं तो साहब एक बार रुकें और मनन करें। dirty politcs

dirty politcsनाम ही नहीं पहचान भी बदलनी पड़ती है 

dirty politcs
allahabad university

dirty politcs नाम के साथ बहुत कुछ बदलना पड़ता है साहब। अफसरों की नेम प्लेट, विभागों के नाम, प्रवेश द्वार, साइन बोर्ड, मुहर, विभागीय स्टेशनरी। भाई साहब ये सब कुछ फ्री में नहीं आता, इसमें रुपया-पैसा खर्च होता है। वो भी करोड़ों में। अब प्रयागराज और इसके पड़ोसी जिलों कौशांबी, प्रतापगढ़ और फतेहपुर में लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, नगर पंचायत और अन्य सभी विभागों के मार्गों के ‘माइल स्टोन’ पर इलाहाबाद की जगह प्रयागराज लिखा जा रहा है। लगा हुआ है लोक निर्माण विभाग। इसीमें 3 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे। उन्हीं के अधिकारी कह रहे हैं ये। जिले के सभी विभागों, अधिकारियों की करीब 12,000 स्टांप तैयार कराये जा रहे हैं। 15 लाख खर्च होंगे इसमें। dirty politcs

 

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dirty politcs : बदलने पड़ेंगे ये नाम भी 

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allahabad highcourt

dirty politcs अभी तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलना बाकी है। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय का नाम बदलने के लिए यूनिवर्सिटी ऐक्ट बदलना पड़ेगा। इलाहाबाद हाइकोर्ट का नाम बदलने के लिए संसद की अनुमति लेनी है। अगले वर्ष होने वाले कुंभ से पहले इलाहाबाद रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर प्रयागराज करना है। ये आसान है। इसके लिए मात्र एक अधिसूचना जारी करने की जरूरत है।
देवबंद के विधायक बृजेश सिंह ने अपनी भाजपा सरकार से देवबंद का नाम बदलकर देववृंद करने पर उतारू थे। बखेड़ा खड़ा किये हुए थे।
इलाहाबाद का नाम बदलकर यूपी की योगी सरकार ने प्रयागराज में कर दिया। dirty politcs

…तो इस वजह से बदला गया नाम 

dirty politcs इसको बाकयदा संगठित रूप से किया गया। 8 जुलाई को प्रतापगढ़ में कुंडा स्थित तुलसी इंटर कॉलेज में विश्व हिंदू परिषद, काशी प्रांत के पदाधिकारियों की बैठक हुई। उसमें इलाहाबाद का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री को भेजा गया। उसके 3 माह बाद कुंभ के मार्गदर्शक मंडल की बैठक में मुख्यमंत्री ने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने की घोषणा की।
उन्होंने एक तीर से 2 निशाने साधे। पहला तो संतों के गुस्से को शांत किया, दूसरा दिखा दिया कि अगर कोई असल तरीके से हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने का मादा रखता है तो वह योगी आदित्यनाथ। हिंदू आइकॉन जो बने रहना है। और तो और अर्धकुंभ का नाम बदलकर कुंभ कर दिया। मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर कर दिया 13 नवंबर को फैजाबाद जिले को अयोध्या बना दिया। dirty politcs

dirty politcs : नाम परिवर्तन नहीं नाम वापसी 

dirty politcs भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता इसे सरकार शहरों का नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि नाम वापसी कह रहे हैं। वह भी तब जब स्थानीय स्तर और बुद्धिजीवियों के स्तर पर इसका विरोध हो रहा है। dirty politcs

राजनीति है असल कारण

dirty politcs दरअसल गोरखपुर, फूलपुर, कैराना और नूरपुर के उपचुनाव में हार के बाद भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। विकास के नाम पर माहौल बदलने की ताकत बीजेपी में है नहीं, ये स्पष्ट हो चुका है। अब मुद्दा बचता है हिंदुत्व का। इसका सबसे आसान टार्गेट हैं सांस्कृतिक धरोहरें और किताबें। dirty politcs

dirty politcs : सपा-बसपा का गठजोड़ रोक सकता है अश्वमेधी अभियान

dirty politcs बीजेपी को ये बात भी पता है कि चाहे जितना हिंदुत्व को बढ़ावा दिया जाये लेकिन प्रदेश के जातीय समीकरण ही ऐसे हैं कि सपा और बसपा का गठजोड़ इसे रोकने की कूबत रखता है। 1993 का इतिहास यही बताता है। जब देश में अयोध्या के राम मंदिर की लहर थी, हिंदुत्व और धर्मा का मुद्दा चरम पर था लेकिन इन दोनों पार्टियों ने भाजपा का रथ रोक दिया था। dirty politcs

खूब हो रहा विरोध 

dirty politcs प्रदेश सरकार नाम पर नाम बदल रही है लेकिन उसके सहयोगी दल इस नेक कार्य में उसके साथ नहीं हैं। दिव्यांग विभाग के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर खुलेआम इसके विरोध में आ चुके हैं।dirty politcs

अखिलेश, मायावती भी पीछे नहीं 

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mayawati and akhilesh yadav
  • dirty politcs पूर्व की अखिलेश सरकार भी इस नाम बदलू कार्यक्रम में पीछे नहीं रही। छत्रपतिशाहूजी महाराज नगर (अमेठी) जिले का नाम बदलकर गौरीगंज किया। रमाबाई नगर जिले का नाम बदल कर कानपुर देहात का पुराना नाम दे दिया।
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भीमनगर, प्रबुद्धनगर और पंचशीलनगर जिले क्रमश: बहजोई, शामली और हापुड़ बन गय। कांशीराम नगर, महामायानगर और जेपीनगर का नाम बदल कर कासगंज, हाथरस और अमरोहा हो गया। dirty politcs
  • उससे पूर्व विश्वविद्यालयों के नाम बदलीकरण का दौर चला। तत्कालीन मायावती सरकार ने कानपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर छत्रपति शाहू महाराज यूनिवर्सिटी कर दिया।
  • नाम बदल गये लेकिन किस्मत बदलनी अभी बाकी है। प्रदेश के युवाओं को किस्मत बदलने के लिए मिट्टी छोड़ने पड़ रही है और परदेश में अपमानित, प्रताड़ित हो रहे हैं। dirty politcs

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