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आखिर क्यों दरक रहा है मोदी का वोट बैंक?

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narendra modi politics

narendra modi politics : ब्रांड मोदी के बदलाव की कहानी समाजसेवी अबुल कलाम की जुबानी 

 

abul kalam
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याद है मुझे वो 2012 से 2014 का दौर, जब विकास, वृद्धि, नौकरियां और अच्छे दिनों की बात होती थी। हर क्षेत्र में अच्छे दिन। पारदर्शी, न्यूनतम सरकार, मिनिमम गवर्नमेंट-मैक्जिम गवर्नेंस के वादे। बात भविष्य की होती थी, क्रांति की होती थी, कांतिकारी की होती थी। ऐसा लग रहा था मानो नौकरियों की बयार बहने वाली हो। सारी बेरोजगारी दूर होने वाली हो। हर आदमी की आय कई गुना बढ़ने वाली हो। हर तरफ एक ही थीम थी ‘सबका साथ, सबका विकास’। युवा उत्साहित था, वह मोदी की आलोचना कतई सुनना नहीं चाहता था। मोदी का विरोध करने वाले चैनलों की टीआरपी पर असर पड़ गया, मजबूरन उन्हें अपनी लाइन लेंथ बदलनी पड़ गयी। narendra modi politics

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…अरे ये क्या आपने युवाओं की नौकरी
की जगह गाय थमा दी 

इस बारे में शिवहर के समाजसेवी अबुल कलाम का कहना है कि मोदी जी ने युवाओं को जॉब की जगह गाय थमा दी है, उनके हाथ में रोजगारोपरक औजार देने की बजाय आपके पैतृक संगठन आरएसएस ने तलवारें थमा दीं। बाजार का एक नियम है जब किसी मार्केटिंग विशेषज्ञ के लिए अपना ब्रांड बदलना आसान नहीं होता है तो वह ब्रांड को उल्टा कर देता है। यही किया मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने। जिस ब्रांड ने उन्हें जीत दिलाई अब वे उसी को उल्टा कर रहे हैं। आज जब युवा उनसे नौकरियों का जवाब मांग रहे हैं तो वह कर रहे हैं कि 47 सांसदों वाली कांग्रेस ने नहीं करने दिया।

narendra modi politics : टूट चुका है
गुजरात मॉडल का भरोसा 

मोदी जी ने संदेश दिया कि कि मैं समस्याएं जानता हूं और मुझे इनके समाधान भी पता हैं। मुझे बस जनादेश और समय दे दीजिये। देश की जनता खासकर युवाओं ने भरोसा किया। लेकिन अब जब फिर से चुनाव की घड़ी आ गयी है तो उन्होंने ब्रांड उलट दिया है। अब वह उन लोगों पर हमलावर हैं, जो वर्तमान में है हीं नहीं। वह देश की दुर्गति, अपनी असफलताओं के लिए इंदिरा गांधी, जवाहर लाल नेहरू को दोषी ठहरा रहे हैं। नौकरियों, विकास और समृद्धि के वादे कहीं पीछे छूट चुके हैं। जवाहर लाल नेहरू, उनके पिता, बेटी , पटेल, शास्त्री अब उनके भाषणों के केंद्र बिंदु हैं। न्यूनतम सरकार और गुजरात मॉडल का भरोसा तो कब का टूट चुका है। narendra modi politics

सरकारी एजेंसियों का पूरा दुरुपयोग 

‘एजेंसियों’ का पूरा दुरुपयोग करने के बाद वह गांधी और चिदंबरम परिवार के कारनामों का हवाला दे रहे हैं। लेकिन जब उनसे यह पूछा जाता है कि कितने भ्रष्टाचारियों की सजा दी तो उनके पास कोई जवाब नहीं है। narendra modi politics

वर्तमान में नहीं भूतकाल पर मांग रहे वोट 

अब दूसरा चुनाव जितना है तो अमित शाह और और योगी आदित्यनाथ ने अपनी तोपें चलानी शुरू कर दी हैं। उनके पास मोदी के 4.5 साल के प्रदर्शन का जवाब तो है नहीं लेकिन भूतकाल पर वोट मांग रहे हैं। narendra modi politics

narendra modi politics :
युवा हताश था, हताश है 

कलाम कहते हैं युवा हताश था और आज भी है अपनी बेकारी से, बरोजगारी से, कम आमदनी से, आर्थिक असुरक्षा से, अपने अपमान से, मोदी में उसे अपना मसीहा दिखा, लेकिन मोदी ने उसे गाय सौंप दी। अब वह गुस्से में है। नतीजा साफ है अभी हाल में हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के चुनावों में बीजेपी गांवों ही नहीं शहरों में भी जनाधार खो चुकी है। मोदी और शाह अब अपने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर रहे हैं। वह अब उसी तरह से राहुल गांधी को वंशवादी बताकर अपने वोट अपने पास संभालकर रखना चाहते हैं जैसे कभी बीजेपी के पुरोधा सोनिया गांधी को विदेशी मूल का बताकर वोटों की गिनती में बढ़त हासिल करना चाहते थे। narendra modi politics

narendra modi politics :भ्रमित हो गया है वोटर 

कलाम का मानना है कि अब वोटर असमंजस में फंस गया है वह सोच रहा है अब वह वंशवाद के बारे में राय बनाये या अपने धंधे-पानी को ठीक करने के बारे में सोचे। आज के युवा को लोकतंत्र के इस आयाम में वंशवादी सत्ता पसंद नहीं है लेकिन उसे अहंकार और जिद भी पसंद नहीं है। नोटबंदी और जीएसटी की जिस जिद में व्यापारी का धंधा-पानी चौपट हो गया, युवाओं की नौकरियां चली गयीं। narendra modi politics

योजनाओं के नाम पर सपने दिखाये जा रहे हैं 

योजनाओं के नाम पर सपने बेचे जा रहे हैं। आयुष्मान भारत के नाम पर एक कागजी लाइसेंस दे दिया गया है। वोटर समझ ही नहीं पा रहा कांग्रेस सरकार में भी वह बेकार था और आज सपने दिखाने वाली मोदी सरकार में भी उसकी वही हालत है। अब दोनों में अंतर क्या है? यही कि मोदी के पास गाय संरक्षणा का नारा है और दिखाने के लिए अल्पसंख्यकों का डर है। उसने कुछ नया खोजने के लिए मोदी की बीजेपी को सिर आंखों पर बिठाया था लेकिन यह तो इंदिरा युग वाली कांग्रेस निकली। अंतर इतना है इसमें डर और गाय का तड़का लगा हुआ है। narendra modi politics

फुस्स हुए भ्रष्टाचार के आरोप के सारे पटाखे 

अब भ्रष्टाचार पर लगान कसने की बात कर लें तो जिस 2जी स्पेक्ट्रम और कोयला घोटाले की छाती पीट-पीट कर आपने सत्ता हथियाई उसमें सभी आरोपी बेदाग साबित हो चुके हैं। कांग्रेस नेता और कंपनियां, उनके अधिकारी सब कोर्ट से मुक्त हो चुके हैं। राष्ट्रमंडल खेल, आदर्श घोटाला और एयर इंडिया खरीद जैसे तमाम मामले पीछे छूट चुके हैं। अब जब नाकामियां सिर पर खड़ी हैं तो फार्मूला साफ है। ब्रांड को उल्टा करने का फॉर्मूला। अब वोट खुद के लिए नहीं मांगने हैं, बल्कि विरोधियों को हराने के लिए मांगने हैं। वाह मोदी जी वाह। narendra modi politics

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