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2019 में अपने बूते सरकार नहीं बना पायेगी बीजेपी

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‍BJP election strategy in 2019
‍BJP election strategy in 2019

समाजसेवी अबुल कलाम से समझिये आगामी लोकसभा चुनावों का चुनावी गणित

‍BJP election strategy in 2019
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भले ही बीजेपी और उसके रणनीतिकार कोई भी जुगत भिड़ा लें लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी अपने बूते सरकार नहीं बना पायेगी। इसकी कम से कम 100 सीटें कम होंगी। इसको समझने के लिए बहुत ज्यादा सेफोलॉजी यानि चुनाव विश्लेषण में जाने की आवश्यकता नहीं है सिर्फ राजनीति की बुनियादी समझ ही काफी है। आइए जानते हैं क्या होगा लोकसभा 2019 का गणित। ‍BJP election strategy in 2019

हिंदी पट्टी के राज्यों के पास हैं 543 में से 226 सीटें 

देश की हिंदी पट्टी में बिहार, झारखंड, यूपी, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश ये 10 राज्य आते हैं। लोकसभा की 543 में से 226 सीटें इन्हीं प्रदेशों में से आती है। इसके अलावा दक्षिण भारत में 132, पश्चिम भारत में 78, पूर्वी भारत में 88, उत्तरी भारत में 19 सीटे हैं। BJP election strategy in 2019

गैर-हिंदी भाषी राज्यों में बीजेपी को मिली थीं 91 सीटें

2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को हिंदी पट्टी के राज्यों में 192 और गैर हिंदी भाषी राज्यों में 91 सीटें मिली थीं। अगर 2019 में भी बीजेपी अपना यही प्रदर्शन दोहराने में कामयाब हो जाती है तो केंद्र में वह सरकार बना पायेगी या नहीं ये इस बात पर निर्भर करेगा कि हिंदी पट्टी के राज्यों में कैसा प्रदर्शन करती है। ये हिंदी पट्टी के राज्य ही तय करेंगे कि 2019 में दिल्ली की सत्ता में कौन सा दल काबिज होगा। BJP election strategy in 2019

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‍BJP election strategy in 2019
‍BJP election strategy in 2019

वर्तमान में हिंदी पट्टी के राज्यों में बीजेपी की सरकार है और सभी राज्य सरकारें एंटी इंकबेंसी, किसान आंदोलन, आर्थिक असंतोष, बेरोजगारी जैसे मुद्दों से जूझ रही हैं। इन राज्यों की जनता बीजेपी के कामकाज से खुश नहीं है। इसका ताजा सबूत हाल ही में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव परिणामों में बीजेपी के प्रदर्शन से सामने आ गया है। इन तीनों ही राज्यों में बीजेपी ने अपनी सत्ता गंवा दी है। BJP election strategy in 2019

यूपी में होगा 30 से 40 सीटों का नुकसान

कलाम के अनुसार, अगर उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन अस्तित्व में आता है तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी को 30 से 40 सीटों का नुकसान होने की आशंका है। इस राज्य में उसकी सीटें 71 से घटकर 40 से 50 के बीच में ही रह जायेंगी। BJP election strategy in 2019

‍BJP election strategy in 2019 : हिंदी पट्टी के राज्यों में
कम से कम 180 सीटें हासिल करना आवश्यक

लोकसभा में सरकार बनाने के लिए 272 का जादुई आंकड़ा हासिल करना आवश्यक है। इस आंकड़े को हासिल करने के लिए बीजेपी को हिंदी पट्टी के राज्यों में कम से कम 180 सीटें हासिल करना आवश्यक है। अगर हिंदी पट्टी के साथ उत्तर के राज्यों को जोड़ लें तो बीजेपी के पास जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात में लोकसभा की 273 सीटें हैं। इन 273 सीटों में से 226 बीजेपी के पास हैं। BJP election strategy in 2019

बिहार का महागठबंधन बना चुनौती

बिहार में विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन बन चुका है। इसमें कांग्रेस, लालू यादव की राजद, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा मिलकर बीजेपी और सहयोगियों के खिलाफ ताल ठोंकने को तैयार है। इसी तरह यूपी में अखिलेश यादव की सपा और मायावती की बसपा गठबंधन बनाने की तैयारी में लगे हैं। अन्य राज्यों में जिस तरह से बीजेपी के खिलाफ मौहाल तैयार हो रहा है और कांग्रेस और उसके सहयोगी दल महागठबंधन बनाने की तैयारी में लगे हैं उससे साफ है कि 2019 में बीजेपी को कम से कम 80 से 100 सीटों का नुकसान होने की आशंका है। BJP election strategy in 2019

‍BJP election strategy in 2019 : जितनी बढ़त मिलेगी,
उससे कई गुना ज्यादा होगा नुकसान
 

विधानसभा चुनावों में भले ही तेलंगाना में बीजेपी की सहयोगी के सहयोगी दल तेलंगाना राष्ट्र समिति को सफलता मिली हो और पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु में एनडीए को बढ़त मिलती दिखायी दे रही हो लेकिन इतनी सीटों की भरपाई हो पाना मुश्किल है जितनी बीजेपी को नुकसान होने की आशंका है। BJP election strategy in 2019

मुद्दों पर भारी ध्रुवीकरण का खेल 

कलाम का मानना है कि बीजेपी की ध्रुवीकरण की नीति उसकी मुद्दा आधारित राजनीति पर हावी हो गयी है। युवाओं के सामने रोजगार और रोजी-रोटी का संकट स्पष्ट खड़ा है। नोटबंदी और जीएसटी का बीजेपी के पास स्पष्ट जवाब नहीं है। उसकी गाय, मंदिर और कट्टरता की राजनीति देश में कभी भी ज्यादा दिनों तक कामयाब नहीं रही है। वह 1992 में बाबर मस्जिद का ढांचा गिरने के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार का गठन इसका पुख्ता सबूत है।

सहयोगियों की अवहेलना पड़ेगी भारी 

कलाम का कहना है कि बीते 5 सालों में जिस तरह से बीजेपी ने बहुमत के घमंड ने अपने सहयोगी दलों की जिस तरह से अवहेलना की है उसका खमियाजा पार्टी को अवश्य भुगतना पड़ेगा। तीन राज्यों में हार के बाद बीजेपी नेताओं को अपने सहयोगियों की अहमियत समझ में आने लगी है। शिवसेना, टीडीपी और रोलसपा के किनारा करने के बाद बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

रामविलास पासवान भी खड़ी कर सकते हैं चुनौती 

बिहार में अपने सहयोगियों को साथ जोड़े रखने और लोक जनशक्ति पार्टी के नेता राम विलास पासवान और उनके बेटे चिराग पासवान की चिरौरी-विनती से बीजेपी नेताओं की छटपटाहट समझी जा सकती है। मोदी-शाह की जोड़ी को बिना अपने सहयोगियों को कोई जानकारी दिये या उन्हें विश्वास में लिये बिना फैसले लेने की आदत है। अब यही पार्टियां बीजेपी को परेशान कर रही हैं। मोदी-शाह के सामने बड़ी चुनौती है।